रंग महोत्सव में सोमवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन हुआ। कवियों ने हास्य, वीर और शृंगार रस की रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। वातावरण में देश भक्ति की रचनाओं से वंदे मातरम के जयकारे गूंजते रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ एडीजे प्रथम अजय कुमार त्यागी, सीडीओ प्रताप सिंह भदौरिया, पीडी आरके गौतम ने किया। दीप प्रज्ज्वलन विधायक विपिन वर्मा डेविड ने किया। फिरोजाबाद से आए कवि ओमपाल सिंह निडर ने पढ़ा कि एक-एक लाख या करोड़ों शीश कट जाएं, देशद्रोही स्वरों को उभारना नहीं चाहिए। पद्मिनी शर्मा ने पढ़ा कि कौन हूं, मैं कहां से आई हूं, भूल जाती हूं आपसे मिलकर। नैनीताल की कवयित्री गौरी मिश्रा ने पढ़ा कि जो लगे प्यास तो उस प्यास को गंगा कर दे, दुश्मनों के दिलों में खौफ से दंगा कर दे। ऐ मेरे प्यारे वतन जान लुटा दूं तुझपे, मौला मेरे आंचल को तिरंगा कर दे। जयपुर के अब्दुल अयूब गौरी ने पढ़ा कि वतन बांटने का साजिश का सब अभियान तुम्हारा था, कश्मीर तो क्या, ये पूरा हिंदुस्तान तुम्हारा था। पानीपत के योगेंद्र मुद्गल ने कहा कि दोनों पप्पू बुआ के संग सोच रहे, मोदी...संचालन कर रहे डा. राहुल अवस्थी ने पढ़ा कि तेरा किरदार क्या है जानता हूं...। सम्मेलन में अजात शत्रु, गौरव चौहान इटावा, डा. सौरभकांत शर्मा बहजोई, चेतना शर्मा आगरा, डा. कैलाश मंडेला भीलवाड़ा, योगिता चौहान एटा और डा. अजय अटल कासगंज ने भी काव्य पाठ किया। संयोजक उदयवीर सिंह वर्मा ने आभार जताया। कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारी मानवेंद्र सिंह, रोहित अग्रवाल, मोहम्मद कमर, एसडीएम सदर डा. संजीव कुमार, हरीबाबू गुप्ता, राजवर्द्धन बिसारिया, डा. राकेश मधुकर, राजकुमार भरत, अमित कुशवाह आदि मौजूद रहे।