जिले में लगातार बढ़ रही यूरिया की मांग को लेकर कोआपरेटिव विभाग सक्रिय हो गया है। यूरिया की मांग को लेकर हो रहे हंगामे से विभाग ने सहकारी समितियों को किसानों को मांग के अनुरूप खाद उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए है। विभाग के अनुसार जिले में 13 हजार मीट्रिक टन यूरिया आ चुकी है। लेकिन समितियों पर यूरिया की कमी इस बात का प्रमाण है कि जिले में अब तक यूरिया का पर्याप्त भंडारण नहीं है।
रबी की प्रमुख फसल गेहूं के लिए इन दिनों जिले में यूरिया की मांग बढ़ी हुई है। यूरिया के लिए सहकारी समितियों पर किसानों की भीड़ रहती है। कुछ दिनों पहले डीएपी की किल्लत को लेकर जिले में कई जगह जमकर बवाल मचा था। इसके बाद कोआपरेटिव ने दूसरे जिलों से डीएपी लेकर किसानों को कुछ हद तक राहत जरूर दी थी। वहीं, सोमवार को मंडी समिति स्थित इफ्को केंद्र पर यूरिया ले रहे किसानों को जबरन लगेज देने का मामला सामना आया था। वहीं, कई समितियों पर गत दिनों किसानों ने बवाल इसलिए मचाया है कि यूरिया वितरण करने में संचालन अपनी मनमानी कर रहे हैं।
विभाग के अनुसार इस बार जिले को 21,775 एमटी यूरिया का लक्ष्य मिला था। इसमें से उसे अब तक लगभग 13 हजार एमटी यूरिया प्राप्त हो चुकी है। लक्ष्य के हिसाब से पूरी यूरिया न मिल पाने से आए दिन किसी न किसी सहकारी समितियों पर खाद खत्म हो जाती है। इससे किसानों को समय से यूरिया नहीं मिल पा रही।
जिले में अब तक 13 हजार एमटी यूरिया आ चुकी है। शासन द्वारा जिले को और यूरिया भेजी जा रही है। केंद्रों को भी निर्देशित कर दिया गया है कि किसानों को जबरन यूरिया के साथ लगेज न दिया जाए।
-- विनोद कुमार शर्मा, सहायक निबंधक, कोआपरेटिव एटा