एटा। एटा से कासगंज रेल लाइन 2017-18 के बजट में स्वीकृत हो चुकी है। इसके लिए बजट में भी प्रावधान किया गया। केंद्र ने उप्र सरकार से इस परियोजना के लिए आधी कीमत और मुफ्त जमीन देने की मांग की। जिस पर प्रदेश सरकार ने सहमति नहीं जताई। आरटीआई (सूचना का अधिकार अधिनियम) के तहत यह जानकारी रेल मंत्रालय से दी गई है।
कुल 29 किमी लंबी इस रेल लाइन के लिए जिले के लोग वर्षों से मांग करते चले आ रहे हैं। कई बार आंदोलन भी हो चुके हैं। लोगों की मांग के मद्देनजर केंद्र सरकार ने इसे 2017-18 के आम बजट में स्वीकृति दे दी। इस कार्य के लिए 276.90 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। रेल मंत्रालय को यह बजट जारी नहीं किया गया। जिसके चलते परियोजना पर काम शुरू नहीं हो सका। हाल ही में एक स्थानीय व्यक्ति ने आरटीआई के तहत जब रेल मंत्रालय से जानकारी मांगी तो इसमें नई चीजें सामने आई हैं। उन्होंने सवाल किया था कि क्या एटा को रेल नेटवर्क से जोड़ने की रेल मंत्रालय की कोई योजना है या नहीं? इस पर डिप्टी डायरेक्टर (वर्क) आरके प्रेमी ने जानकारी दी है कि एटा-कासगंज नई लाइन का निर्माण 2017-18 के बजट में शामिल किया गया। लेकिन डीपीआर (विस्तृत कार्ययोजना) के अनुुसार प्रोजेक्टर वित्तीय रूप से आगे नहीं बढ़ सका। इस संबंध में उप्र सरकार से परियोजना की आधी लागत साझा करने और जमीन मुफ्त दिए जाने के लिए पूछा गया। लेकिन उप्र सरकार ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया। जिसके चते यह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका।
इन पर भी दिया जवाब
रेल नेटवर्क से एटा को जोड़े जाने के सवाल पर डिप्टी डायरेक्टर ने अन्य लाइन के बारे मेेें भी जवाब दिया है। 74 किमी दूरी की एटा-अलीगंज नई रेल लाइन के बारे में बताया कि इसका सर्वे 2015-16 में कराया गया था। वहीं 238 किमी दूरी की एटा-जालौन वाया भरथना वाया औरैया नई लाइन के लिए भी 2015-16 में सर्वे पूरा हो चुका है। लेकिन दोनों ही प्रोजेक्ट धनराशि के अभाव में आगे नहीं बढ़ सके।
एटा-कासगंज रेल लाइन प्रोजेक्ट लंबित चल रहा है। अभी इसके संबंध में कोई नई जानकारी या पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।
- राजेंद्र सिंह, पीआरओ इज्जतनगर मंडल