एटा। एटा डिपो हमेशा चर्चा में बना रहता है। एआरएम के चचेरा भाई के स्थान पर दो वर्ष पूर्व फर्जी परिचालक टिकट बना रहा था। उस दौरान तत्कालीन एडीएम सहित एसडीएम ने पकड़ा था। बाद में कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर दी गई थी। रोडवेज बसों में इस प्रकार की लापरवाही सामने आना कोई बड़ी बात नहीं है। परिचालक एक सोची समझी रणनीति के तहत काम करते हैं। सभी परिचालक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। कब, कहां और कौन चेकिंग कर रहा है, इसकी जानकारी एक-दूसरे को इसी माध्यम से दी जाती है। इसी का परिणाम है कि मंगलवार को 21 यात्रियों पर फर्जी टिकट मिले। बात एआरएम के चचेरे भाई की करें तो 2022 में एआरएम के चचेरे भाई के स्थान पर फर्जी परिचालक टिकट बनाता मिला था। इस मामले में भी कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की गई थी। फर्जी परिचालक के पास से टिकट मशीन सहित तमाम प्रपत्र भी बरामद किए गए थे।
उस समय बस स्टैंड प्रभारी ने संविदा कर्मी चालक व परिचालक के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। लेकिन मामले में आगे क्या हुआ पता ही नहीं चला। इसके अलावा पहले भी डिपो में तैनात 12 कर्मचारियों की जगह बाहरी व्यक्ति काम करते पाए गए थे। वहीं तीन परिचालकों को एडीएम ने पकड़ा भी था। इसके बाद भी परिचालकों के हौसले बुलंद है।