एटा। दलित किशोरियों को घर से ले जाने के बाद गंगा की कटरी व अन्य स्थानों पर बंधक बनाकर रखा गया। उनके साथ दुष्कर्म किया गया। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट अशोक कुमार ने इसे दलितों पर गंभीर अपराध मानते हुए दो दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
मामला करीब 30 साल पुराना सिकंदरपुर वैश्य थाना (अब कासगंज जनपद में) से जुड़ा हुआ है। किशोरियों के पिता ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 3 अप्रैल 1995 की रात गांव के ठाकुर जाति के कुछ लोग 12 वर्ष और 15 वर्ष की दो पुत्रियों को बहला-फुसलाकर ले गए। कुछ दिन बाद दोनों किशोरियों को पुलिस ने बरामद किया। चिकित्सकीय परीक्षण और बयानाें के आधार पर दुष्कर्म का मामला भी विवेचना में जोड़ा गया। सत्यवीर, सुरेश और चंद्रपाल उर्फ चंदी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की गई। विचारण के दौरान चंद्रपाल की मृत्यु हो गई।
अदालत में कई साल तक इस मामले में सुनवाई चली। किशोरियों ने अपनी गवाही में बताया कि रात में आए आरोपी शादी के बहाने बहलाकर दोनों बहनों को ले गए। एक डॉक्टर के घर में रखकर दुष्कर्म किया। इसके बाद बूढ़ी गंगा कटरी में 6 दिन रखा। वहां लगातार दुष्कर्म करते रहे। इसके बाद अशोकपुर बाग ले गए। वहां से पुलिस ने हम लोगों को बचाया। दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने सत्यवीर और सुरेश को दोषी पाया। इनको एससी-एसटी एक्ट के अंतर्गत आजीवन कारावास और 21-21 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित करने का आदेश दिया है।