एटा। बालक को अगवा करने वाले दो दोषियों को अपर जिला सत्र न्यायाधीश सुधा ने सात-सात साल की सजा सुनाई है। साथ ही बीस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा न करने पर एक माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
सजा पाने वाले नेमसिंह और कुंवरपाल वर्ष 2004 में 28 जुलाई की मध्यरात्रि घर में घुसकर रिजोर क्षेत्र के गांव नगला खंगर के राम मनोहर के 12 वर्षीय पुत्र अनुज को अगवा कर ले गए थे। इसकी रिपोर्ट राम मनोहर ने तीन अगस्त को थाना रिजोर में दर्ज कराई थी।
रिपोर्ट में राम मनोहर ने कहा था नेमसिंह निवासी टीकमपुर थाना रिजोर, कुंवरपाल निवासी दलीपपुर थाना औंछा जिला मैनपुरी, रायसिंह निवासी रजपुरा थाना सकीट, रामदास निवासी टीकमपुर थाना रिजोर 28 जुलाई 2004 की रात 12 बजे घर में घुस आए। घर के आंगन में पत्नी बेटे अनुज के साथ सो रही थीं। चारों लोग अनुज को उठाकर ले जाने लगे। बेटे के चीखने पर पति-पत्नी जाग गए।
आंगन में जल रही लालटेन की रोशनी में बदमाशों को पहचान लिया गया। बदमाश बेटे को ले जाते समय 3 लाख रुपये की मांग और पुलिस में सूचना देने पर जान से मारने की धमकी देते हुए चले गए। सभी बदमाश हथियारों से लैस थे। 3 अगस्त को रिजोर पुलिस ने फर्रुखाबाद जिले के मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव जलालपुर से अनुज को बरामद किया। बरामदगी के समय कुंवरपाल को पुलिस ने मौके से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की जांच में रामपाल और घनश्याम को भी दोषी पाया गया। कोर्ट में दोनों पक्षों की बहस सुनने पर जिला अपर सत्र न्यायाधीश सुधा ने अपहरण के मामले में नेमसिंह और कुंवरपाल को दोषी पाते हुए सजा सुनाई है।