दीपोत्सव के चौथे दिन प्रतिपदा को गोवर्धन महाराज की पूजा हुई। घर-घर गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर महिलाओं ने मंगल गीत गाए। मंदिरों में भी गोवर्धन की आकृति बनाकर पूजा आर्चन की गई। श्रद्धालुओं ने गोवर्धन की परिक्रमा कर मनौती मांगी। मंदिरों में अन्नकूट का प्रसाद वितरण किया गया।
घरों के बाहर सोमवार सुबह गोवर्धन महाराज का पूजन किया गया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए। घर-घर अन्नकूट महोत्सव मनाते हुए परिवार की खुशहाली और स्वास्थ्य की कामना की। दरअसल, दीपावली की पड़वा पर गोवर्धन पूजा की परंपरा है। परंपरा के तहत गोबर से भगवान गोवर्धन की आकृति को बनाकर उसकी पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता के चलते सोमवार को प्रात: महिलाओं ने पूजा की। इसके बाद घरों में परिवार की महिलाओं ने सामूहिक रुप से गाय के गोबर से घर के आंगन में गोवर्धन महाराज की आकृति बना कर विधि-विधान पूर्वक पूजा अर्चना की। घर के सभी सदस्यों ने आकृति की परिक्रमा लगाई और मनौतियां मांगीं। शहर के कैलाश मंदिर, सीताराम मंदिर में आयोजित भंडारे में प्रसाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।