सोरों को प्राचीन ऐतिहासिक गंगातीर्थ, मंदिर मठों की नगरी कहा जाता है। प्राचीन शिल्प कला के बेजोड़ नमूनों की झलक यहां के मंदिरों में देखने को मिलती है। वराह मंदिर, सीतारामजी मंदिर, रघुनाथजी मंदिर, द्वारिकाधीश मंदिर, भागीरथ गुफा आदि प्राचीन दर्शनीय ऐतिहासिक मंदिर हैं। इसके बाद ही यह प्राचीन नगरी अब तक तीर्थनगरी का दर्जा नहीं ले सकी है। इसका दर्द यहां के लोगों में है। वे चाहते हैं कि सोरों तीर्थनगरी घोषित हो, हरि की पैड़ी तक गंगा की धार बहे। इसी मुद्दे पर सोरों की जनता इस बार वोट देना चाहती है। अमर उजाला के साथ चुनावी बातचीत में लोगों ने बेबाकी से अपनी बात रखी।
हरि की पैडी को गंगा नहर कैनाल से जोडकर बहती धार का सपना आजादी के 70 साल बाद भी अधूरा है। इस पर जनप्रतिनिधि उदासीन बने हैं।
दिनेश पाराशर, तीर्थपुरोहित
धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर तीर्थनगरी अभी तक स्थान नहीं पा सकी है। जनप्रतिनिधि अब तक झूठे आश्वासन देकर जनता से छलावा करते रहे हैं। अब इस बहकावेे में जनता नहीं आएगी।
रामदर्शन महेरे, व्यवसाई
इस बार विकास के लिए गंभीर सोच व सकारात्मक विचार रखने वाले प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे। विधायक ऐसा हो जो प्राचीन नगरी का विकास करा सकें।
रामकिशोर त्रिगुणायत, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य
तीर्थ नगरी घोषित होने के बाद बेरोजगारी कम होगी। लोगों को काम मिलेगा। उद्योग धंधे बढ़ाने के लिए प्रयास करने वाले को विधायक चुनेंगे। जिससे युवाओं को रोजगार मिल सके।
- विकास पाठक, व्यवसाई।