जिले में कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने व्यवस्था की खामियों पर लगातार चोट करते हुए हक की जंग को जीता है। सही मायने में यह उस तंत्र के गण हैं जिसकी नींव भारतीय संविधान के लागू होने पर पड़ी थी। बबिता जैन, दयाराम पागल और दिनेश चंद्र यादव ऐसे नाम हैं जिन्होंने अपना जीवन समाजसेवा के लिए समर्पित कर दिया है। ये लोग अपने-अपने तरीके से व्यवस्था के खिलाफ लड़ते हुए गणतंत्र को सार्थक करने की कोशिश में जुटे हैं। अपनी मुहिम में मिल रही सफलता से इनका हौंसला भी बढ़ रहा है।
जैन नगर निवासी बबिता जैन वर्ष 2002 से समर्पित होकर समाजसेवा कर रही हैं। वर्ष 2004 में बबिता ने महिला शिक्षा और सुरक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण का बीड़ा उठाया। उन्होंने स्कूलाें में जाकर छात्राओें को अपने पैरों पर खड़े होने और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं से खुद निपटने के लिए जागरूक किया। पर्यावरण संरक्षण के लिए बबिता ने लोगों को पटाखे नहीं जलाने और धुआं से होने वाले स्वास्थ्य को नुकसान और बीमारियों के प्रति जागरूकता अभियान चलाया। उन्होंने रोटी की कीमत जानो अभियान चला रखा है। शादी समारोह और स्कूलों में कार्यक्रम के दौरान बचने वाले भोजन को फेंकने के बजाय उनका उपयोग करना सिखाया। इन समारोह में बचे भोजन को पैकेट में पैक कराकर मलिन बस्तियों में वह वितरित कराती हैं। इसके लिए उन्होंने ने मैरिज होम, धर्मशाला सहित शहर में जगह-जगह पोस्टर और बैनर लगवाए तो अभियान को व्यापक समर्थन मिला। उन्होंने स्कूल जाने वाले निर्धन बच्चों और भट्ठों पर रहने वाले बच्चों के लिए गर्म कपड़े वितरित करने का अभियान शुरु हुआ। इसके लिए पहले घर-घर जाकर पुराने कपड़े एकत्रित किए और अब उन्हाेंने नगर में सात कलेक्शन सेंटर खोले हैं। जहां लोग अपने बच्चाें के पुराने कपड़े दे जाते हैं और बबिता अपनी टीम के साथ निर्धन बच्चों में वितरित करती हैं। बबिता के इस सेवा कार्य में मेडिकल स्टोर संचालक उनके पति सुनील कुमार जैन, सहेली ऊषा जैन, वीना जैन, रुचि जैन, मोहित जैन, सतीश, रिशू, प्रांशु मिश्रा और बेटा पूरा सहयोग कर रहे हैं।
खारे पानी की लड़ाई के लिए पागल बने दयाराम
जलेसर तहसील क्षेत्र के नगला मीरा में जन्मे दयाराम यूं तो हाईस्कूल पास हैं, लेकिन पिछले 32 सालों से जिले में खारे पानी और किसानाें की समस्या की लड़ाई लड़ रहे हैं। कभी भूख हड़ताल तो कभी धरना, प्रदर्शन कर समस्याओं से निजात दिलाना दयाराम पागल का मकसद बन गया है। जिले में उनकी पहचान पागल के नाम से है। आलम यह है कि किसी समस्या पर उनके आंदोलन शुरू करने की भनक भर से जिले के प्रशासनिक अधिकारी मुश्किल में पड़ जाते हैं। पागल ने सबसे पहला आंदोलन 1985 में जलेसर क्षेत्र में 16 किमी एरिया के खारे पानी से निजात दिलाने के लिए शुरू किया था। किसानों को खारे पानी की समस्या के निजात दिलाने के लिए उन्हाेेंने पूर्व कृषि मंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष रहे कांग्रेस नेता बलराम जाखड़ से मिलकर इलाके में रजबाह का निर्माण करा कर किसानों के लिए सिंचाई के पानी की व्यवस्था कराई। किसानों की समस्या पर कड़ाके की सर्दी, और भीषण गर्मी में भी बिना वाहन के पैदल दौड़ने की आदत ने उनके नाम दयाराम के साथ पागल लगा दिया। सिंचाई संसाधन, पेयजल समस्या, सड़क, चकरोड पर अवैध कब्जाें के लिए दयाराम ने 100 दिन की भूख हड़ताल के अलावा 17 बार आमरण अनशन कर प्रशासन को कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया।
आरटीआई कार्यकर्ता दिनेश चंद्र यादव यूं तो 1999 से जिले की जनता के लिए विभिन्न मुद्दों पर अंदोलन करते आ रहे हैं, लेकिन आरटीआई का चाबुक उन्हाेंने 2006 में थामा तो कई डीएम और एडीएम को अपने वेतन से जुर्माना भरना पड़ा। दिनेश ने जिले में रोडवेज सेवा शुरू कराने, एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉप, अधिग्रहित भूमि का मुआवजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
दिनेश चंद्र यादव ने बताया कि शिकोहाबाद मार्ग पर वर्ष 1999 तक प्राइवेट बस यूनियन का एक तरफा राज था। यूनियन के लोग रोडवेज बसें चलने पर सड़क और पुल ध्वस्त करा देते थे। लेकिन 27 दिसंबर 1999 को जब एटा शिकोहाबाद मार्ग पर रोडवेज बसों के संचालन के लिए फीरोजाबाद के जसराना में चक्का जाम किया तो शासन हिल गया। नतीजा यह हुआ कि 29 दिसंबर को ही रोडवेज के तत्कालीन एआरएम नरेंद्र यादव को एटा-शिकोहाबाद मार्ग के लिए फूलों से सजी रोडवेज बस लेकर धरना स्थल पर पहुंचना पड़ा। तब जाकर आंदोलन खत्म किया। वर्ष 2007 से लेकर 2009 तक आरटीआई के तहत विभिन्न मुद्दों पर सूचना नहीं देने पर तत्कालीन डीएम शशि भूषण लाल सुशील, गौरव दयाल, एडीएम देवेंद्र दीक्षित, अखिलेश मिश्रा, डीएसओ के वेतन से सूचना आयोग में 25 हजार रुपये तक जुर्माने कटवा कर दम लिया। वर्ष 2008 में दिनेश ने रोडवेज के एक दर्जन रिटायर कर्मियाे़ं के रुके पड़े फंड ओर ग्रेच्युटी का मुद्दा आरटीआई के माध्यम से उठा कर कर्मियों को उनके फंसे भुगतान छह महीने में कराया। दिनेश ने एटा से लखनऊ तक आंदोलन कर सेना कलां से दिल्ली तक रोडवेज बस सेवा शुरू कराई। जबकि वर्ष 2009 में दिनेश ने बल्लूपुर रेलवे स्टेशन को फ्लैग स्टेशन का दर्जा दिलाने के लिए हॉल्ट स्टेशन बल्लूपुर में दो एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉप कराया। वर्तमान में दिनेश पिछले साल बारिश में बरबाद हुई किसानाें की फसलों का मुआवजा दिलाने को आरटीआई के माध्यम से आंदोलन चला रहे हैं, जल्द ही सफलता मिलने की उम्मीद है।