एटा। पुरानी पेंशन की बहाली सहित निजीकरण का विरोध अटेवा संगठन कर रहा है। यह लड़ाई 11 वर्षों से लड़ी जा रही है। रविवार को जिले में पहुंचे संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय बंधु ने यह बात कही। इस दौरान अटेवा के संघर्षों पर बन रही डॉक्यूमेंट्री जनक्रांति के लिए यहां पदाधिकारियों पर हुए लाठी चार्ज की शूटिंग की गई।
शहर के बीपीएस कॉलेज में रविवार को अटेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पहुंचे। उन्होंने फर्रुखाबाद, हाथरस, कासगंज, फिरोजाबाद, अलीगढ़ सहित जनपद के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। कहा कि सभी पदाधिकारियों को 25-25 सदस्य बनाने की जिम्मेदारी दी जा रही है। संगठन जिस विजन को लेकर चल रहा है वो प्रदेश में परिवर्तन का कार्य करेगा। अटेवा एक ऐसा संगठन है जो निजीकरण की लड़ाई को लड़ रहा है। पेंशन बहाल होने से ही काम नहीं चलेगा। संविदा और आउटसोर्सिंग को भी हटाना है।
उन्होंने कहा कि रेलवे के कर्मचारी भी संगठन जुड़ रहे हैं। जल्द ही 18 जोन कमेटियां बनाई जाएंगी। उन्होंने 26 सितंबर को प्रदेश भर के जिला मुख्यालयों पर एनपीएस, निजीकरण का हवन कराने की बात कही। बैठक के बाद संगठन के संघर्षों पर बन रही डॉक्यूमेंटी की शूटिंग की गई। इसमें महिला व पुरुष पदाधिकारियों ने पुलिस की भूमिका निभाई। 2016 में विधानसभा घेराव के समय हुए लाठी चार्ज को शूट किया गया।
शूटिंग के बारे में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि प्रदेश के 10 जनपदों में यह शूट की गई है। एटा भी इसमें शामिल था, तो यहां भी शूट हो रही है। प्रदेश महामंत्री नीरज पति त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष विक्रमादित्य मौर्य, संगठन मंत्री रजत प्रकाश, जिला संयोजक लखनऊ सुनील सहित जिलाध्यक्ष ओमेंद्र सिंह यादव, मनोज यादव, शौर्या मिश्रा आदि पदाधिकारी मौजूद रहे।