एटा। साइबर ठगी की वारदात लगातार बढ़ रही हैं। हर सप्ताह औसतन एक व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो रहा है। पीड़ितों की सहायता के लिए जिला मुख्यालय पर थाना बना हुआ है। इसके बाद भी 10 माह में यहां केवल 33 लोगों की रिपोर्ट दर्ज हुई है। अधिकांश मामले में लेटलतीफी बरती जा रही है तो कई दर्ज किए ही नहीं जा रहे।
साइबर क्राइम की रोकथाम के लिए जिला मुख्यालय स्थित पुलिस लाइन में थाना बनाया गया है। जनता को जागरूक करने के साथ ही पीड़ित की उचित समय पर रिपोर्ट दर्ज करना जरूरी बताया जाता है। हर थाने में साइबर सेल भी बनाई गई है। मुख्यालय पर स्थित साइबर थाने में जनवरी से 16 अक्तूबर तक मात्र 33 केस ही दर्ज किए गए हैं। वहीं अगर ठगी की बात करें तो जनवरी से अब तक 50 से अधिक लोग शिकार हुए हैं।
व्यापारी और नौकरीपेशा लोग भी हो रहे हैं शिकार
साइबर ठगों के निशाने पर अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे लोग ही नहीं, अच्छे पढ़े-लिखे व्यापारी और नौकरीपेशा लोग भी हैं। इनमें बड़े व्यापारियों से लेकर पुलिस और सेना के जवान और अधिकारी तक शामिल हैं। स्वयं पुलिस विभाग के कर्मचारी भी साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं।
केस-1
थाना बागवाला में तैनात उपनिरीक्षक से ठगे 88 हजार
थाना बागवाला में तैनात उपनिरीक्षक हरेंद्र सिंह निवासी निलौहा थाना मवाना जिला जिला मेरठ के साथ 88001 रुपये की ठगी हुई। 6 सितंबर को ड्यूटी के दौरान इनके मोबाइल पर लगातार 2 मैसेज आए। देखने पर पता चला कि खाते से रुपये निकाले गए हैं। हरेंद्र सिंह ने बताया कि न तो कोई ओटीपी आया और न ही किसी प्रकार के लिंक पर क्लिक किया। इसके बावजूद खाते से 88001 रुपये निकाल लिए गए। मामले में तहरीर देने के बाद भी 23 सितंबर को रिपोर्ट दर्ज कराई है।
केस-2
ऑनलाइन पार्ट टाइम जॉब का झांसा देकर 6.71 लाख ठगे
शहर के पीपल अड्डा निवासी शब्बीर अहमद ने रिपोर्ट में लिखा कि ऑनलाइन पार्ट टाइम जॉब का झांसा देकर उसके साथ 6.71 लाख रुपये की ठगी की गई। 19 से 22 अगस्त के बीच 6 बार में 6.71 लाख रुपये की ठगी कर ली। इस मामले में लेटलतीफ 6 सितंबर को रिपोर्ट दर्ज की गई।
साइबर थाने में 1 लाख या इससे अधिक रुपये की ठगी के मामले ही दर्ज किए जाते हैं। अन्य प्रकार का साइबर क्राइम होने पर संबंधित थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है। इसके अलावा रिपोर्ट दर्ज करने मेंं देरी का कारण पहले मामले की जानकारी प्राप्त करना होता है। - संजय कुमार सिंह, सीओ सदर