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मेडिकल कॉलेज में दंत चिकित्सक हैं, व्यवस्थाएं नहीं

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एटा। जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में उच्चीकृत तो कर दिया गया है, लेकिन यहां चिकित्सा सेवाओं की स्थिति नहीं सुधर रही। दंत रोग इकाई का भी यही हाल है। यहां चिकित्सक तो हैं पर मशीनों का टोटा बना हुआ है। दांत उखाड़ने तक की व्यवस्था नहीं है। इसके चलते मरीजों को भटकना पड़ रहा है। मजबूरी में निजी चिकित्सकों के पास जाकर उपचार ले रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज स्थित एमसीएच (मदर एंड चाइल्ड) विंग में दंत रोग इकाई को स्थापित किया गया है। यहां हर रोज करीब 50 मरीज दंत रोग के पहुंचते हैं। लेकिन मशीनें नहीं होने से कई मरीजों का उपचार नहीं हो पा रहा है। अधिकांश मरीज ऐसे आते हैं इनके दांत निकालने और रूट कैनाल ट्रीटमेंट (आरसीटी) की आवश्यकता होती है। चिकित्सक चाहते हुए भी मरीजों को सुविधाएं नहीं दे पा रहे हैं।
बोले-मरीज
दांत कई दिनों से हिल रहा है और दर्द से परेशान हैं। मेडिकल कॉलेज में दांत निकलवाने के लिए आई थी। डॉक्टरों ने मशीन व अन्य यंत्र न होने की बात कहकर केवल दवा लिख दी है। - ओमवती देवी, वनगांव
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दांत में ठंडा-गर्म पानी लगने से परेशान हूं। डॉक्टरों को दिखाया तो आरसीटी कराने की बात कही, लेकिन मशीन न होने से लौटना पड़ रहा है, निजी चिकित्सक से उपचार लेना पड़ेगा। -सुधीर कुमार, पीपल अड्डा
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