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भविष्यवाणी सही निकली तो फिर उफनेगी गंगा

Thu, 02 Jun 2016 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो एटा
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गंगा की बाढ़ पिछले समय में इतनी पीड़ा दे चुकी है कि प्रभावित लोगों को उससे उभरने में वर्षों लग जाते है। - फोटो : अमर उजाला
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गंगा की बाढ़ पिछले समय में इतनी पीड़ा दे चुकी है कि प्रभावित लोगों को उससे उभरने में वर्षों लग जाते है। बाढ़ से तबाह होने वाला इंफ्रास्ट्रेक्चर भी कई वर्षों में खड़ा हो पाता है। हर वर्ष बाढ़ से जनपद की लगभग दो लाख आबादी प्रभावित होती है।15 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि की फसलें प्रभावित होती हैं। अत्यधिक बारिश की स्थिति में गंगा की बाढ़ का प्रभाव जनपद के 100 से अधिक गांव पर पड़ता है। कई इलाकों को तो गंगा की मुख्य धारा और बूढ़ी गंगा की धारा दोनों का दंश झेलना पड़ता है। बाढ़ की रोकथाम के लिए अभी तक जनपद में किसी ठोस योजना पर कार्य नहीं हो सका है। 
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इस बार अत्यधिक बारिश का पूर्वानुमान है। यदि ऐसा हुआ तो जनपद में गंगा फिर से तबाही मचाएगी। वर्ष 2010-11 में गंगा में इतनी जबरदस्त बाढ़ आई थी कि एक ट्रेन का इंजन ही गंगा में डूब गया था, जो आज तक नहीं निकाला जा सका है। दो दर्जन से अधिक मार्ग बाढ़ से कट गए। साथ ही दर्जनों लोग काल के गाल में समा गए। कासगंज तहसील क्षेत्र में सोरों का इलाका बाढ़ के लिए संवेदनशील है। हाईफ्लड़ की स्थिति में सोरों इलाके के 18 आबादी वाले गांव बाढ़ की चपेट में आते हैं जबकि 23 गैर आबादी वाले गांव बाढ़ की चपेट में आते हैं। पटियाली इलाके के 16 गांव तो सहावर इलाके के दर्जनभर बाढ़ की चपेट में आते है। इसके अतिरिक्त मध्यम एवं लो फ्लड गांव की संख्या भी काफी अधिक है। कई बार तो गंगा और बूढ़ी गंगा दोनों का मिलन तक हो जाता है। इस स्थिति में ग्रामीणों को भारी तबाही का सामना करना पड़ता है।

ई-मेल से मिला सुझाव
वाटर कंट्रोल चैनल लगाना अति आवश्यक
बारिश के मौसम में बूढ़ी गंगा में गंगा का पानी प्रवेश कर जाता है, जिसके कारण बूढी गंगा के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। गंगा का पानी बूढ़ी गंगा में न घुसे इसके लिए बूढ़ी गंगा के मुहाने पर पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए एक वाटर कंट्रोल चैनल लगाना अति आवश्यक है तथा साथ ही जहां-जहां बूढ़ी गंगा पर तटबंध मौजूद नहीं हैं, वहां तटबंध भी बनाए जाएं। -  इंजीनियर अमित तिवारी
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गंगा में बाढ़ और कटान को रोकने के लिए सिंचाई विभाग बांधों की मरम्मत और उनके रखरखाव का कार्य कर रहा है। पूर्व में कटान रोकने के लिए बड़ी परियोजनाओं पर कार्य हो चुका है। इस बार भी गंगा पर कटान और बाढ़ रोकने को कार्य हो रहा है। प्रशासन पूरी तरह से संभावित बाढ़ के खतरे को लेकर सतर्क है। 
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- हरी शर्मा अधिशाषी अभियंता सिंचाई विभाग

बूढ़ी गंगा की बाढ़ का प्रकोप इस इलाके में काफी अधिक रहता है, लेकिन किसान किस्मत के सहारे ही रहते हैं। प्रशासन की मदद समय रहते नहीं मिल पाती। 
-बालिस्टर, देवी नगला

हमारा बाढ़ प्रभावित गांव है। शासन-प्रशासन का ध्यान इस गांव पर नहीं रहता। जब आपदा आती है तभी प्रशासनिक अधिकारी दिखाई नहीं देते हैं।
- दयाराम, घोसगंज
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