मिरहची। दुल्हन के लिए शगुन का लहंगा व चप्पल लेकर नहीं पहुंचने वाली बरात को लड़की पक्ष के आक्रोश का सामना करना पड़ गया। बरात को बैरंग लौटा दिया गया। अगले दिन सुबह से शाम तक पंचायत चली। तब जाकर समझौता हुआ और दुल्हन की विदा की गई।
मिरहची थाना क्षेत्र के जिन्हैरा की बरात 15 जुलाई को कासगंज जनपद के गांव कुरामई में पहुंची। यहां उदयवीर सिंह कुशवाहा की पुत्री कुमकुम से शादी होनी थी। गांव कुरामई और जिन्हैरा की दूरी एक किलोमीटर भी नहीं है। लेकिन सीमा क्षेत्र की वजह से जनपद अलग-अलग हैं। बरात पहुंचने पर जब शगुन का लहंगा और चप्पल मांगा गया तो इसके बारे में मना कर दिया गया। इसे लेकर लड़का और लड़की पक्ष में विवाद हो गया और शादी के रंग में भंग पड़ गया। ऐसे में वैवाहिक रस्में भी नहीं हुईं और बरात बिना दुल्हन के वापस लौट आई।
संभ्रांत लोगों एवं समाजसेवियों को विवाद तथा बिना दुल्हन बरात लौटने की जानकारी हुई तो उन्होंने मंगलवार को वहां पहुंचकर वार्ता की। घंटों चली पंचायत के दौरान देरशाम तक समझौता हो गया। लड़का-लड़की दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी गलतियां मानकर सात फेरे की रस्म पूरी कराई। इसके बाद दुल्हन को दूल्हा दीपक के साथ विदा कर दिया गया।