मिरहची। फलों का राजा कहे जाने वाले आम का नाम जुबां पर आते ही मुंह में पानी भर आता है। मिरहची क्षेत्र के स्वादिष्ट, मीठे, रसीले आम सिर्फ अपने क्षेत्र या जनपद ही नहीं, बल्कि दूर-दर तक के जनपदों और प्रांतों में भी प्रसिद्ध हैं। जो वहां मिठास बिखेर रहे हैं।इन दिनों क्षेत्र के हर बाग की डाली पर पके आम लदे हुए हैं। बंपर उत्पादन की उम्मीद में बागवान खुश हैं। बीते वर्ष की बात करें तो आम की पैदावार में काफी कमी रही थी। जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा । अधिकांश बागवान लागत भी नहीं निकाल सके। इस बार प्रकृति ने मेहरबानी की है। शुरुआत से ही आम के वृक्ष बौर से भर आए। आंधी-तूफान, ओलावृष्टि भी कम रहे। ऐसे में इस बार की आम की पैदावार से पिछले साल के नुकसान की भरपाई के साथ अच्छा मुनाफा होने की उम्मीद है।
इन प्रजातियों की इन गांवों में होती है बागवानी
नगला चोइया, सिकतरा, गढ़ौली, मुहम्मदपुर, बुडेन, ततारपुर के बागों में दशहरी, देसी, कलमी, लंगड़ा, टिकारी, बंबई, चौंसा, फजली आदि प्रजातियों के आम होते हैं। यहां का दशहरी और चौंसा प्रजाति का आम अपने स्वाद और वजन के चलते काफी पसंद किया जाता है। इसके चलते बागानों में इन प्रजातियों की पैदावार बड़े पैमाने पर की जाती है।
यहां तक जाते हैं आम मिरहची के प्रसिद्ध आम जहां स्थानीय बाजारों में तो पसंद किए ही जाते हैं। वहीं दिल्ली, जोधपुर, जयपुर, अजमेर, ग्वालियर, इंदौर, दिल्ली की मंडियों में भी मांग रहती है।
बोले व्यापारी
शुरुआती दौर में ही वृक्ष फलों से लदे देखकर बंपर पैदावार का अनुमान पूरा होता दिखाई दे रहा है। कुदरत की मेहरबानी से इस बार आम का व्यापार लाभकारी साबित होने की उम्मीद है।
सोरन सिंह
दो वर्षों के लिए बाग पट्टे पर लिया था। पिछले वर्ष खराब मौसम के चलते उत्पादन कम रहा। काफी नुकसान हुआ था। इस बार नुकसान की भरपाई के साथ ही बचत की उम्मीद नजर आ रही है।
- साजिद अली
बोले बागवान
आम की बागवानी पिछले साल घाटे का सौदा रही थी। आंधी, ओलावृष्टि के साथ रोग का भी सामना करना पड़ा था। इस बार परिस्थितियों अनुकूल हैं। अच्छा मुनाफा मिलने की उम्मीद है।
- मुन्नालाल
पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार पैदावार अच्छी हुई है। आंधी-तूफान से फसल बची रही है। उम्मीद है कि पिछले वर्ष के घाटे की भरपाई इस वर्ष हो सकेगी।
छत्रपाल सिंह