एटा। चुनाव में सभी मतदाताओं ने वोट डालने में जोश दिखाया। दिव्यांग व बुजुर्ग भी पीछे नहीं रहे, उनके जज्बे ने लोकतंत्र की शान बढ़ा दी। उत्साह से भरपूर बुजुर्गों और दिव्यांगों ने अपने परिवार के सदस्यों के सहयोग से बूथ पर पहुंचकर वोट डाला।
चुनाव आयोग ने 80 वर्ष से ऊपर वृद्ध व दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर पर मतपत्र के माध्यम से मतदान कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि जिले में अधिकांश लोगों ने इसके लिए मना कर दिया। केवल 50 ऐसे मतदाताओं ने ही हामी भरी थी। बच्चे हुए मतदाताओं के लिए रविवार को मतदान का अवसर था। इस मौके पर दिव्यांग व बुजुर्गों ने न तो लाचारी बयां की और न बूथ के लिए कच्चे व कठिन रास्तों से हार मानी।
बेटे के साथ पहुंची 80 साल की मां
सुबह करीब 11 बजे विधानसभा जलेसर के एमजीएम इंटर कॉलेज मतदान केंद्र पर मतदाताओं की लंबी कतार लगी हुई थी। उसी वक्त राजकुमारी (80) अपने बेटे दिनेश कुमार के साथ वाहन में बैठकर बूथ तक पहुंची। वहां रखी गई व्हील चेयर पर बैठाकर उन्हें बूथ के अंदर लाया गया और उन्होंने मतदान किया। वोट डालने के बाद उनके चेहरे पर मुस्कराहट छा गई। कहा कि यह तो सबसे बड़ा अधिकार है, जो हम आम लोगों को सरकार चुनने का मौका देता है।
नहीं ली व्हील चेयर, कंधे पर बैठाकर लाए
विधानसभा जलेसर के बूथ नगवई में छेदीलाल (92) का कहना था कि मतपत्र से घर पर मतदान करने के बारे जानकारी नहीं थी। आज मतदान के दिन अपने भतीजे गौरीशंकर के साथ वोट डालने के लिए आए। चलने में असमर्थ हैं तो भतीजे ने कंधों पर बैठाकर बूथ तक पहुंचाया। बूथ पर भतीजे से व्हील चेयर का प्रयोग करने को कहा गया तो उन्होंने कहा कि वोट डालने के लिए व्हील चेयर की क्या जरूरत है, हम ही काफी हैं अपने दाऊ को उठाने में।
बाबा-नाती एक ही ट्राईसाइकिल पर पहुंचे मतदान के लिए
विधानसभा जलेसर के बूथ बारा समसपुर पर बाबा और नाती एक ही ट्राईसाइकिल पर मतदान करने के लिए पहुंचे। बाबा रामस्वरूप चलने में असमर्थ थे, घर में उन्हें बूथ तक ले जाने में किसी ने हिम्मत नहीं दिखाई। वहीं नाती बृजेश कुमार दिव्यांग है। उसने अपने बाबा को ट्राईसाइकिल पर बैठाकर बूथ तक पहुंचाकर बूथ डलवाया और अपना वोट भी डाला।