गेहूं की खरीद में रोड़ा बनी गुणवत्ता
- फोटो : अमर उजाला
धीमी गति से हो रही सरकारी गेहूं खरीद का कारण गेहूं की गुणवत्ता को बताया जा रहा है। शासन की ओर से जारी की गई क्रय नीति के तहत क्रय केंद्र सिर्फ छह प्रतिशत तक ही सिकुड़े हुए गेहूं को खरीद सकते हैं, लेकिन प्रतिकूल मौसम की वजह से गेहूं के दाने में पर्याप्त ग्रोथ न होने से किसानों का गेहूं नहीं बिक पा रहा है। जबकि जिले में इस बार दो से तीन गुना तक गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हुई है।
शासन की ओर से निर्धारित की गई गेहूं की गुणवत्ता किसानों को परेशान कर रही है। बुवाई से लेकर गेहूं की कटाई तक फसल के लिए इस बार मौसम प्रतिकूल रहा है। इस कारण गेहूं के दाने में जो ग्रोथ होनी चाहिए थी वह नहीं हो पाई है। दाना काफी पतला निकला है। कई केंद्रों पर गेहूं गुणवत्ता मानकों से अधिक खराब होने पर केंद्र प्रभारियों ने वापस कर दिया है। इसका लाभ बिचौलिये उठा रहे हैं। बिचौलिये किसानों को उनके गेहूं की सरकारी खरीद न होने का डर दिखाकर उनसे मन चाहे दर पर खरीद कर रहे हैं। बता दें कि शासन की ओर से 1525 रुपये का समर्थन मूल्य घोषित है, जबकि बिचौलिये किसानों को गुणवत्ता का डर दिखाकर गेहूं 1400 से 1450 की दर से खरीद रहे हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
क्रय नीति के अनुसार छह प्रतिशत तक गुणवत्ता प्रभावित वाले ही गेहूं की खरीद की जा रही है। इससे अधिक प्रभावित गेहूं को अभी नहीं खरीदा जा रहा है। इस संबंध में शासन को निर्णय लेना है।
जितेंद्र यादव, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
क्या कहते हैं किसान नेता
प्रतिकूल मौसम के कारण गेहूं की गुणवत्ता अधिक प्रभावित हुई है। शासन की ओर से गुणवत्ता प्रभावित मानकों को यदि समय रहते नहीं बढ़ाया गया तो किसान आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
अखिल यादव, किसान नेता।