गर्मी बढ़ने के साथ ही बिजली की अंधाधुंध कटौती भी शुरू हो गई है। शहर ही
नहीं ग्रामीण क्षेत्रों का भी बुरा हाल है। फाल्ट ट्रिपिंग के नाम पर भी
कटौती हो रही है, वहीं लोड पड़ने के चलते ट्रांसफार्मर भी फुंक रहे हैं।
शहर में विभाग 15 घंटे आपूर्ति देने का दावा कर रहा है, जबकि कटौती नौ घंटे
हो रही है, लेकिन कटौती का भी कोई समय निश्चित नहीं है। कब कटौती हो जाए
और कब बिजली आए। इससे विभागीय अधिकारी भी अनजान हैं। दूसरी ओर, उपभोक्ताओं
और व्यापारियों में भी रोष है।
जैसे-जैसे गर्मी अपना रौद्र रूप दिखा रही है, वैसे-वैसे बिजली के नखरे
भी शुरू हो गए हैं। दिन में होने वाली कटौती को तो लोग किसी तरह से झेल
लेते हैं, लेकिन रात में एक तो मच्छरों का प्रकोप ऊपर से बिजली के न आने से
लोगों की रात की नींद गायब है। वहीं उद्योग धंधों पर भी इसका प्रभाव पड़
रहा है। बिजली कटौती बंद किए जाने को लेकर गत दिवस ही व्यापारियों ने
ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी थी। दूसरी ओर, लोड पड़ने के चलते ट्रांसफार्मर भी
फुंक रहे हैं। शहर में तो ट्रांसफार्मर फुंकने पर 24 घंटे के अंदर उसे
बदलवा दिया जाता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कई-कई महीने तक
ट्रांसफार्मर नहीं बदले जा रहे। वहीं बिजली भी चार से पांच घंटे ही मिल रही
है। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
क्या है बिजली कटौती का समय
- रात एक बजे से चार बजे तक
- सुबह सात बजे से 10 बजे तक
- दोपहर तीन बजे से सायं छह बजे तक
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कितनी जरूरत, कितनी मिल रही
1.6
मेगावाट बिजली की जरूरत है, जबकि मिल 1.2 मेगावाट बिजली रही है। यदि पूरी
बिजली मिले तो 20 घंटे आपूर्ति हो, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा।
शहर में कितने उपभोक्ता: 2600
लाइन लॉस: 30 से 32 प्रतिशत
साढ़े चार किमी की पड़ रही नई लिंक लाइन
बिजली
आपूर्ति में सुधार के लिए विभाग द्वारा एक नई लिंक लाइन बनाई जा रही है।
55 लाख रुपये की लागत से पड़ने वाली इस नई लाइन को शहर में स्थापित तीनों
बिजलीघर रेलवे रोड, देहात कोतवाली और औद्योगिक क्षेत्र से जोड़ा जाएगा। डबल
लाइन हो जाने से यदि किसी बिजलीघर में कोई दिक्कत आती है तो उक्त क्षेत्र
की आपूर्ति बाधित नहीं होगी, उसे दूसरे बिजलीघर से जोडा जाएगा। इसे पूरा
होने में चार महीने का समय लगेगा।
गर्मी को देखते हुए बिजली की
मांग भी बढ़ी है। फिर भी उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली देने का प्रयास किया जा
रहा है। फाल्ट आदि होने पर तत्काल उन्हें सही कराया जा रहा है।
- राजीव चतुर्वेदी, अधिशासी अभियंता