गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। बप्पा को आकार और रंग देने का काम तेजी से चल रहा है। गणेश चतुर्थी पांच सितंबर को है। इस दिन से गणपति महोत्सव की जिले में शुरुआत हो जाएगी। मूर्ति कलाकार भी मूर्तियों को अंतिम रूप देने में लगे हैं।
मूर्तिकारों ने छोटी से लेकर सात से आठ फीट ऊंची मूर्तियां बनाई हैं। महोत्सव के लिए पूजा पंडाल लगाने वाली संस्थाओं और संगठनों ने बड़ी प्रतिमाओं के आर्डर पहले से ही दे रखे हैं। फीरोजाबाद निवासी विजय ने आगरा रोड पर मूर्तियां बनाई हैं। वह अपने पूरे परिवार के साथ प्रतिमाओं को बनाने में जुटे हैं। उन्होंने अब तक करीब डेढ़ सौ छोटी मूर्तियां बना ली हैं। मूर्ति बनाने वाले कारीगरों ने बताया कि दो सौ से पांच हजार रुपये तक की मूर्तियां उनके पास उपलब्ध हैं।
ऐसे बनती है गणपति की प्रतिमा
मूर्तिकार विजय ने बताया कि प्रतिमा बनाने के लिए चिकनी मिट्टी का घोल बनाकर उसे सांचे में डाला जाता है। बड़ी प्रतिमा के लिए हर अंग का सांचा अलग होता है। सांचे से निकालने के बाद हर अंगों को जोड़कर बड़ी प्रतिमा का रूप दिया जाता है। इसमें नारियल के जूट का भी प्रयोग किया जाता है, जिससे मजबूती आती है।
क्षत्रिय मंदिर पर विराजेंगे गणपति
गणेश चतुर्थी को लेकर श्रद्धालुओं में भी उत्साह नजर आ रहा है। मराठा गलाई एसोसिएशन और सर्राफा व्यवसायी संघ द्वारा शहर में गणेश उत्सव का आयोजन किया जाएगा। पांच सितंबर को शाम चार बजे गली बलदेव सहाय से प्रतिमा की शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो विभिन्न मार्गों से होती हुए क्षत्रिय स्वर्णकार मंदिर घंटाघर पहुंचेगी। जहां मंत्रोच्चार के साथ गणपति बप्पा की स्थापना की जाएगी। इसके बाद 11 सितंबर को शोभायात्रा के साथ कछला घाट पर गणपति बप्पा का विसर्जन किया जाएगा। सात दिनों तक पांडाल में सुबह-शाम धार्मिक कार्यक्रम होंगे। इस मौके पर समिति अध्यक्ष संतोष मराठा, संदीप मराठा, सागर मराठा, नीलेश मराठा, सुरेश मराठा, सुनील मराठा, अविनाश, महादेव मराठा, रोहित समेत तमाम श्रद्धालु मौजूद रहे।