कहने को तो गुरुवार से राष्ट्रीय पोषण सप्ताह की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन इस दौरान भी बचपन कुपोषण से जूझेगा। पोषण सप्ताह को लेकर जिला प्रशासन सुस्त है, तो जागरूकता के प्रयास भी अधूरे हैं। शासन की ओर से कार्ययोजना नहीं मिलने से प्रशासन ने भी अपनी ओर से कोई पहल करना सही नहीं समझा।
गुरुवार को राष्ट्रीय पोषण सप्ताह को लेकर जिले में कोई जागरूकता नजर न आई। पिछले वर्षों तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के मौके पर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा सप्ताह भर जागरूकता कार्यक्रम कराए जाते थे, लेकिन इस बार यह जागरूकता ठंडी पड़ती नजर आई। जागरूकता के लिए स्वास्थ्य विभाग और बाल विकास विभाग ने कोई भी कार्यक्रम कराना उचित नहीं समझा। वहीं सप्ताह विशेष के दौरान कुपोषित बच्चों को लेकर भी कोई पहल नहीं की गई। आलम यह रहा कि अधिकारियों ने गर्भवतियों को जागरूक करने के लिए संगोष्ठी तक नहीं की। वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों पर हौसला पोषण योजना की बदहाली बदस्तूर जारी नजर आई। पोषण सप्ताह के पहले दिन ही तमाम केंद्रों पर न तो गर्म खाने का वितरण किया जा सका और न ही कुपोषित बच्चों को स्नेक्स बांटे गए। इसके साथ ही कुपोषण से निपटने के सारे प्रयास भी अधूरे ही नजर आए। प्रशासन और सभी विभाग शासन से फरमान न मिलने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ते नजर आए। किसी ने भी अपने स्तर पर कोई संगोष्ठी तक कराने की जहमत तक न उठाई। सीएमओ डा. आरसी पांडेय ने बताया कि राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के लिए शासन से कोई गाइड लाइन नहीं मिली है। वहीं जिला कार्यक्रम अधिकारी अमर बहादुर सिंह ने बताया कि हौसला पोषण योजना के तहत गर्भवतियों को पुष्ट किया जा रहा है। इससे कुपोषण की स्थिति काफी हद तक नियंत्रित हुई है। पोषण सप्ताह के लिए कोई शासनादेश नहीं मिला है।