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दर्द से कराहते लौटे मरीज, खत्म हुई हड़ताल

Wed, 21 Sep 2016 05:23 PM IST
अमर ब्ययूराो एटा
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फार्मासिस्ट की हड़ताल से फिर हुई परेशानी, शाम को खत्म - फोटो : अमर उजाला
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बंद पड़ा पंजीकरण कक्ष, दवा वितरण कक्ष में सन्नाटा और मरीजों से भरा पड़ा जिला अस्पताल। डाक्टर थे, लेकिन न तो इलाज मिला और न ही पोस्टमार्टम हो सके। फार्मासिस्टों की कई दिनों से चल रही हड़ताल के कारण अस्पताल का यही दृश्य बुधवार की दोपहर तक देखने को मिला।
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कर्मचारियों की हड़ताल के आगे अस्पताल प्रशासन भी नतमस्तक रहा। फार्मासिस्टों के चाबी नहीं देने से सभी कक्षों मेें ताले लटकते रहे। दोपहर बाद जब मांगें पूरी करने का आश्वासन मिलने के बाद हड़ताल समाप्त हुई, तब तक दर्द से कराहते ज्यादातर मरीजों को लेकर उनके तीमारदार जा चुके थे। इससे पहले सुबह डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन और राजकीय नर्सेज संघ ने जिला चिकित्सालय में प्रदर्शन किया। अध्यक्ष एसके दीक्षित ने कहा कि फार्मासिस्टों की 11 सूत्रीय मांगों को सरकार जल्द पूरा करे। इस मौके पर राजेंद्र सिंह सुमन, सुबोध मिश्रा, सुनील कुमार, विनीत कुमार तिवारी, आरके राना, योगेंद्र पाल सिंह यादव, राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव, आरएस शाक्य, संतोष दुबे, रवींद्र कुमार सचान, पुष्पेंद्र पाल, राजेंद्र सिंह फार्मा, नवीन गुप्ता, जंग बहादुर, हरिशंकर, संजीव कुमार, विजय यादव, मीरा बघेल, ईवलिन मैसी, मुन्नी देवी पांडेय आदि मौजूद रहीं।
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सीएचसी-पीएचसी पर हालात संभले
जिले में संचालित सीएचसी-पीएचसी पर फार्मासिस्टों और नर्सों की हड़ताल का मिला जुला असर रहा। अलीगंज, अवागढ़, मारहारा, जलेसर, जैथरा, सकीट स्थित सीएचसी और पीएचसी में संविदा डाक्टरों और कर्मचारियों ने व्यवस्था संभाले रखी, लेकिन आपूर्ति नहीं होने के चलते दवाओं का वितरण नहीं हो सका।
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क्या कहते हैं स्वास्थ्य विभाग के अफसर
फार्मासिस्ट ने पंजीकरण कक्ष, दवा वितरण कक्ष की चाबी नहीं देने के कारण मरीजों का पंजीकरण नहीं हो सका। चिकित्सकों ने खुद पर्चे बना कर मरीजों को दवा लिखी है। दोपहर बाद हड़ताल खत्म हो गई है। कुछ मरीजों को अस्पताल से लौटना भी पड़ा है।
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डॉ एके चतुर्वेदी
सीएमएस, जिला चिकित्सालय एटा
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