एटा। आस्था का महीना श्रावण मास 30 जुलाई से शुरू हो रहा है। इस माह भक्तगण शिवालयों में भगवान शिव की आराधना करते हैं। शहर के तीनों प्रमुख शिवालयों को पहुंचने वाले रास्तों का बुरा हाल है। हमारी टीम ने शिवालय और कांवड़ मार्गों की पड़ताल की तो हालात बदतर नजर आए। जहां शिवालयों में संबंधित मंदिर प्रबंधनों ने साज-सज्जा से लेकर अभिषेक कराने की तैयारी शुरू कर दी हैं, वहीं प्रशासन ने इन मार्गों पर पैचवर्क कराना तक उचित नहीं समझा है।
शिवालयों की ओर जाने वाले रास्तों में कई स्थानों पर झाड़ियां उग आई हैं। कहीं कीचड़ तो कहीं जलभराव के बीच होकर शिवभक्तों को जाना पड़ेगा। इन्हीं मार्गों से कांवड़िये और श्रद्धालु मंदिरों तक पहुंचेंगे। अलीगंज के गांव बिल्सड़ पछायां स्थित प्राचीन शिव मंदिर में दूर-दराज से सैकड़ों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। मंदिर तक जाने वाला रास्ता जर्जर हो गया है, वहीं परिसर के सामने कीचड़ व गंदगी फैली हुई है। मार्ग के दोनों ओर झाड़ियां हैं। मार्ग पर कई स्थानों पर अस्थायी अतिक्रमण है, जिससे रास्ता संकरा हो चला है। यहां के निवासी राजेश, अरविंद, अर्जुन का कहना है कि बारिश के बाद यहां से निकलना मुश्किल हो जाता है।
कैलाश मंदिर मार्ग: जिले के प्रसिद्ध कैलाश मंदिर परिसर के आसपास भी सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। मंदिर परिसर के सामने गंदगी के ढेर लगे हैं और भैंसों का तबेला बना हुआ है। यहां सावन के सोमवार को बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं, लेकिन अभी तक विशेष सफाई अभियान शुरू नहीं किया गया है। सड़क पर भी कई जगह गहरे गड्ढे हैं।
हिमगिरि मन:कामेश्वर मंदिर: मोहल्ला मयूर विहार स्थित हिमगिरि नाथ मनकामेश्वर शिव मंदिर जाने वाले मार्ग के रास्ते पर गलियों में जलभराव है। नालियों का गंदा पानी गलियों में बहता रहता है। ऐसे में कांवड़ चढ़ाने वाले भक्तों को गंदगी से होकर गुजरना पड़ेगा। पालिका का ध्यान इस ओर बिल्कुल भी नहीं है।
वनखंडी शिव मंदिर: अलीगंज क्षेत्र के बिल्सड़ पछायां में वनखंडी शिव मंदिर पहुंचने के लिए झाड़ियों खड़ी हुई है। ऐसे में सामने से आने वाले वाहन दिखाई भी नहीं देते हैं। इससे हादसों का खतरा बना रहता है। कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए मार्ग पर मौजूद झाड़ियों को कटवाया जाना चाहिए।