विशेषज्ञ बोले, गर्म हवाओं के बाद खत्म होगा प्रकोप
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मौसम की मार झेल रहे किसानों के साथ ही गुजिया कीट ने बागवानों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। आम के बौर का रस चूस रहे यह कीट बौर को नष्ट कर रहे हैं। दवा के छिड़काव में आ रही लागत जेब पर भारी पड़ रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के बाद चली ठंडी हवाओं से पनपे यह कीट गर्म हवाओं के साथ ही समाप्त हो जाएंगे।
जिला उद्यान अधिकारी वीके शर्मा ने बताया कि एक से दो मिमी लंबे और हल्के गुलाबी रंग के चपटे गुजिया कीट दिसंबर माह में पेड़ों पर चढ़ जाते हैं और आम की कोमल पत्तियों पर अपना बसेरा बना लेते हैं। बौर आते ही ये फूलों पर हमला बोलकर उसका रस चूस लेते हैं और बौर को नष्ट कर देते हैं। उन्होंने बताया कि बदले मौसम चक्र की वजह से इस बार इस कीट का प्रकोप दिख रहा है। मौसम के बदलाव की वजह से अभी गर्म हवाओं का चलना शुरू नहीं हुआ। गर्म हवाओं के चलते ही यह नष्ट हो जाएगा। बागबान इससे बचाव के लिए विशेषज्ञ की राय पर स्प्रे आदि कर सकते हैं। इसके अलावा आम की अच्छी फसल लेने के लिए किसान अपने बागों में जुताई आदि भी करें। इस बार आम की अच्छी पैदावार होने की संभावना है।