पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के निधन पर जिले में भी शोक का माहौल रहा। सरकारी कार्यालयों और शैक्षिक संस्थाओं में शोक सभाओं का आयोजन कर श्रद्धांजलि दी गई।
सोमवार का दिन शोक भरा रहा। दिन की शुरुआत जहां पंजाब में हुए आतंकी हमले की दु:खद खबर से हुई। वहीं सूर्यास्त पूर्व राष्ट्रपति के देहावसान के साथ हुआ। सात दिनों के राष्ट्रीय शोक का जिले में भी असर दिखाई दिया। सरकारी कार्यालयों, कलक्ट्रेट बार जनपदीय शैक्षिक संस्थाओं में मंगलवार को श्रद्धांजलि सभा हुई।
अवकाश को लेकर असमंजस
भारत सरकार के सात दिनों के राष्ट्रीय शोक एवं एक दिन के राष्ट्रीय अवकाश को लेकर लोग असमंजस में रहे। बच्चे-अभिभावक जहां स्कूलों में संपर्क करते दिखे। वहीं प्रधानाचार्य शिक्षक एवं विद्यालय संचालक भी उच्च अधिकारियों के आदेश के इंतजार में रहे। कोई दिशा निर्देश न मिलने के बाद भी जहां कुछ संस्थाओं ने शोक सभा के साथ ही अवकाश कर दिया वहीं स्पष्ट आदेशों के अभाव में कुछ विद्यालय खुले रहे।
छाए रहे मिसाइल मेन के संदेश
सोशल मीडिया पर आतंकी हमला और दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति छाए रहे। अधिकांश साइट पर मिसाइल मेन की उपलब्धियों एवं इनके संस्मरणों का उल्लेख था। तो वहीं समय समय पर इनके दिए गए व्याख्यानों का संग्रह भी लोगों को रोमांचित करता रहा। सर्वाधिक चर्चाओं में इनका वह बयान रहा जब इन्होंने कहा कि मेरी मृत्यु पर शोकावकाश घोषित न किया जाए। वरन इस दिन और अधिक कार्य करें।
सरकारी कार्यालयों पर नहीं झुकाए राष्ट्रीय ध्वज
मिरहची। मिसाइल मैन एपीजे डा. अब्दुल कलाम के निधन पर जहां सात दिनों का राष्ट्रीय शोक की घोषणा की वहीं कस्बा और ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज नहीं झुकाए गए। पीएचसी, सीएचसी, उप डाकघर, कोऑपरेटिव सोसायटी, राजकीय पशु चिकित्सालय, प्राथमिक विद्यालय प्रथम-द्वितीय, पूर्व माध्यमिक विद्यालय मिरहची के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में भी पूर्व राष्टपति के निधन पर ध्वज को नहीं झुकाया गया जब कि राष्ट्रीय इंटर कालेज जिन्हैरा में मंगलवार की सुबह से ही अवकाश घोषित कर दिया गया। दोपहर बाद खंड विकास कार्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज को झुकाया गया। वहीं पीएचसी पर मौजूद एमओआईसी को तो राष्टीय शोक की सूचना तक नहीं थी। थाना मिरहची पर भी राष्ट्रीय ध्वज को नहीं झुकाया गया।