बारिश के चलते जलभराव का एक कारण चोक हुई सीवरलाइन है। नाले तो ओवरफ्लो हैं
ही सीवर लाइन भी चोक है। नगर पालिका को इनकी सफाई कराने की सुध आई है। शहर
में बने 30 प्वाइंटों में से अब तक 12 की सफाई कराई जा चुकी है। शेष को
खोलने में सफाईकर्मी लगे हुए हैं।
शहर में वर्ष 1973 के आसपास सीवर लाइन
बिछाई गई थी। सफाई न होने और देखरेख के अभाव में यह सीवर लाइन कुछ सालों
बाद ही बंद हो गई और शहर जलभराव की समस्या की चपेट में आ गया। इसका आज तक
समाधान नहीं हो पाया है। सीवर लाइन चोक होने के चलते घंटाघर, बाबूगंज, एमपी
नगर, ठंडी सड़क, पोस्ट आफिस आदि इलाके जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं।
नगर पालिका अध्यक्ष राकेश गांधी ने बताया कि बरसात के मौसम में शहर में
जलभराव की समस्या पैदा न हो इसके निदान के लिए सीवर लाइन को खुलवाया जा रहा
है। शहर में बने 30 प्वाइंटों में से अब तक 12 की सफाई कराई जा चुकी है।
इस समय जीटी रोड पर बना प्वाइंट खोला जा रहा है।
सोमवार को हुई झमाझम बारिश ने गर्मी से जूझ रहे लोगों को राहत दी। सुबह से ही काली घटाएं छाने के साथ पूरे दिन कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश होती रही। ठंडी हवाओं से पारा भी गिर गया। जिले के अन्य स्थानों पर भी बारिश होने की खबर है। बरसात से सड़कों पर कीचड़ और गड्ढों में पानी भरने से लोगों को परेशानी हुई।
कई दिन से हवा थमने से उमस भरी गर्मी के चलते लोग बेचैन थे। सोमवार को हुई बारिश से तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। सुबह आसमान में घने बादल छाए हुए थे और ठंडी हवाएं चल रही थीं। इसके बाद रिमझिम बारिश का क्रम शुरू हो गया। रुक-रुककर बारिश होती रही। दोपहर के समय आधा घंटे तेज बारिश हुई। स्कूल से लौट रहे बच्चे भी बैग और यूनीफार्म को बरसात से बचाने के लिए छाता लगाकर आते हुए नजर आए। बरसात से सड़कों पर हुए गड्ढों में पानी भरने से कीचड़ होने से लोगों को आवाजाही में परेशानी हुई। बरसात से रेलवे रोड पूरी तरह से उखड़ गया है, वहीं जीटी रोड पर भी गड्ढे हो गए हैं। कस्बा अलीगंज, मारहरा, मिरहची, जैथरा आदि इलाकों में भी बारिश होने से लोगों ने गर्मी से राहत महसूस की। अलीगंज/मिरहची में बारिश के चलते पुरानी तहसील परिसर, मोहल्ला सुदर्शनदास, बालकिशन आदि जगहों पर जलभराव की समस्या पैदा हो गई।
बरसात किसानों के लिए फायदेमंद
बरसात किसानों के लिए फायदेमंद है। गांव मरथरा निवासी किसान दिनेश गिरि, गांव अंबरपुर निवासी किसान मोहरपाल और नेम सिंह ने बताया कि खेतों में बोई गई मक्का को जहां पानी मिला है, वहीं बाजरा की बुवाई भी शुरू कर दी है। धान की फसल के लिए और तेज बारिश की जरूरत है।