एटा। मारपीट संबंधी एक परिवाद के मामले में अभियुक्त विजेंद्र पाल की ओर से दांडिक निगरानी दायर की गई। अपर सत्र न्यायाधीश नरेंद्र पाल राणा ने इसे आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए पीटने का आरोप कम कर दिया है। अभियुक्त के विरुद्ध अन्य धाराओं में न्यायालय की कार्यवाही जारी रहेगी।
राजबहादुर निवासी गांव मिश्री थाना रिजोर ने इसी गांव के विजेंद्र पाल मिश्रा के विरुद्ध परिवाद दर्ज कराया। इस पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कक्ष संख्या 17 ने प्रसंज्ञान लेकर विचारण के लिए तलब किए जाने का आदेश पारित किया। राजबहादुर का आरोप है कि 3 जून 2022 को वह अपने खेत पर काम कर रहा था।
तभी विजेंद्र पाल तमंचा लेकर आया और गालियां देने लगा। कहा कि तूने जो मुकदमा दर्ज कराया है उसमें फैसला नहीं कर रहा है। तुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे। इसके बाद जान से मारने की नीयत से फायर कर दिया। राजबहादुर ट्रैक्टर की आड़ लेकर बचा।
निगरानी दायर कर अदालत में विजेंद्र पाल ने बताया कि उसने राजबहादुर आदि के विरुद्ध रिजोर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इससे बचने के लिए यह झूठा परिवाद राजबहादुर द्वारा प्रस्तुत किया गया है। परिवाद पत्र व गवाहों के बयानों के आधार पर पीटने का अपराध साबित नहीं होता जिससे घटना संदिग्ध साबित होती है।
सुनवाई के बाद न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि धारा 323 आईपीसी (पिटाई) के संबंध में तलबी आदेश विधि सम्मत नहीं है। धारा 504 और 506 के अंतर्गत तलबी आदेश को यथावत रखा गया है।