गौरव के घर का दृश्य दिल दहला देने वाला है। मां शारदा देवी जो सुन और बोल नहीं सकतीं, पोस्टमार्टम हाउस पर बेटे का चेहरा देखकर बेसुध हो गईं। रिश्तेदार उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे पर उनके दर्द के आगे सभी दिलासा कोरी थीं। गांव वालों के मुताबिक शारदा देवी अपने बड़े बेटे गौरव पर निर्भर थीं। पिता की मौत के बाद वही घर का सहारा बना था। बेटी मधु की शादी की तारीख 14 फरवरी तय थी। भाई की मौत की खबर सुनकर वह बदहवास हो गई। बार-बार यही कह रही थी कि भैया बिना मेरा मंडप कैसे सजेगा।
परिवार के मुताबिक गौरव करीब पांच साल से महाराष्ट्र में हलवाई का काम करता था और बहन की शादी के लिए पैसा जोड़ रहा था। रिश्तेदार अर्जुन कुमार ने बताया कि महाराष्ट्र से लौटते समय उसने फोन पर अपनी बहन से बोला था कि सब कुछ तैयार रखना मैं आ रहा हूं। गौरव और फुफेरा भाई विनय साथ ही काम करते हैं। ये लोग शनिवार को लौटे।
अवागढ़ में बाइक मंगाकर गांव आ रहे थे। गांव के विवेक कुमार ने बताया कि गौरव बेहद शांत-मेहनती और जिम्मेदार युवक था। पिता की मौत के बाद उसने तीनों भाई-बहनों का सहारा बनकर घर को संभाला था। हादसे में उसके फुफेरे भाई विनय की हालत भी गंभीर बनी हुई है, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है।