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केवाईसी के लिए डीएम कोर्ट के बाहर शिक्षकों से की सौ-सौ रुपये की वसूली

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एटा। जिले के समस्त विद्यालयों की केवाईसी (नॉ योर कस्टमर) सत्यापन की रविवार को अंतिम तिथि पर कलक्ट्रेट स्थित एनआईसी में कैंप लगाया गया। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कर्मचारियों के इशारे पर डीएम कोर्ट परिसर के बाहर एक प्राइवेट साइबर कैफे को बैठा दिया गया। जिसके माध्यम से शिक्षकों से केवाईसी कराने के नाम पर सौ- सौ रुपये लिए गए। केवाईसी कराने पहुंचे शिक्षकों से एक सौ रुपये लिए जा रहे थे। केवाईसी के रूप में प्राइवेट साइबर कैफे वाले दो पेज की छायाप्रति निकाल कर दे रहे थे।
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न्याय अनुभाग से दिया गया बिजली कनेक्शन
डीएम कोर्ट परिसर में अगर अधिकारियों ने साइबर कैफे संचालक को अनुमति नहीं दी तो उन्हें न्याय अनुभाग से बिजली का कनेक्शन कैसे मिल गया। कैफे संचालक न्याय अनुभाग से बिजली का कनेक्शन लेकर प्रिंटर व लैपटॉप पर काम कर रहे थे।
केवाईसी से किया जाता है संस्था का सत्यापन
जिला विद्यालय निरीक्षक मिथिलेश कुमार ने बताया जिले के समस्त शिक्षण संस्थानों की केवाईसी कराकर सत्यापन किया जाता है। जिसके तहत पहली बार शासन द्वारा ऑनलाइन सत्यापन किया जा रहा है। जिससे अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिल सके।
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विद्यालयों की केवाईसी कराने के मामले में शिक्षकों से एक सौ रुपये वसूले जा रहे हैं, जो कि बहुत निदंनीय है। इसकी घोर निंदा करता हूं।
- डॉ. नंदलाल, शिक्षक एमएलसी, प्रत्याशी
केवाईसी कराने के लिए यहां पर लूट खसौट मचा रखी है। प्रत्येक शिक्षक से सौ रुपये लिए जा रहे हैं। बाहर दुकानों पर मात्र 20 रुपये में केवाईसी की छायाप्रति दी जा रही है।
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-फतेह सिंह, शिक्षक
डीएम कोर्ट परिसर के बाहर प्राइवेट साइबर कैफे संचालक ने एएसडीएम की अनुमति से दुकान लगाई है। यहां शिक्षकों की केवाईसी कर रहे हैं।
- साधना गुप्ता, लिपिक, अल्पसंख्यक कल्याण व वक्फ विभाग
डीएम कोर्ट परिसर के बाहर प्राइवेट साइबर कैफे संचालक द्वारा दुकान लगाने का मामला संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच कर उसे हटवा दिया जाएगा।
- अलंकार अग्निहोत्री, एएसडीएम
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