कांशीराम कालोनी के बाहर ऐसे डंप है कचरा
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शहर के बाहर शीतलपुर ब्लॉक क्षेत्र में चार स्थानों पर बनी कांशीराम कालोनी के छह हजार से अधिक बाशिंदे भीषण गर्मी में बिजली, पानी को तरस रहे हैं। शहरी अथवा ग्रामीण क्षेत्र का फैसला नहीं होने से यहां के नवजातों का पंजीयन, विधवा, विकलांगों को पेंशन समेत अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा। कालोनी में लगे कूड़े के ढेर, टूटी नालियां, बंद पड़े ओवरहेड, बदहाल पार्क, खराब हैंडपंप, फुंके ट्रांसफार्मर, जर्जर तार बदलने तक की जिम्मेदारी कोई विभाग लेने को तैयार नहीं है। वहीं कई लोगों ने आवंटित आवास किराए पर भी उठा रखा है।
बसपा शासन काल में शहरी बेघर गरीबों के लिए कांशीराम कालोनी बनाई गई थी। जिला मुख्यालय के समीप चार स्थानों पर बने 1500 आवासों में करीब छह हजार लोग रहते हैं। सात साल पूर्व बनी कालोनी में रहने वालों के लिए अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि वे शहरी हैं या ग्रामीण। आधार कार्ड पर पते अलग-अलग लिखे हैं। एक ही ब्लॉक में रहने वाले लोगों में किसी के नाम के साथ ग्रामीण तो किसी के साथ शहरी लिखा है। बिल जमा नहीं होने के कारण विद्युत निगम ने खराब ट्रांसफार्मर को बदलना जरूरी नहीं समझा। यही मनमानी जलनिगम की भी है। कई ओवरहेड बंद पड़े हैं। हैंडपंप खराब हैं। यह अलग बात है कि यहां की सफाई और पेयजल व्यवस्था नगर पालिका कराती है।
कई बार शहर के पास चार स्थानाें पर बने कांशीराम आवास के लोगाें को नगर पालिका में शामिल करने की मांग उठाई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके चलते वहां रहने वाले लोग अलग-थलग पड़ चुके हैं। पालिका की ओर से वहां सफाई और पानी की व्यवस्था कराई जाती है।
राकेश गांधी
पालिका चेयरमैन