सुंदरिये, मुंदरिये होय, तेरा कौन बेचारा हो, दूल्हा भट्टी वाला होय... लोहड़ी गीत गाते हुए ढोल, और डीजे की धुन पर झूम रहे लोगों ने लोहड़ी धूमधाम से मनाई। साथ ही एक दूसरे को रेबड़ियां बांटकर खुशहाली की कामना की। इसके साथ ही अलाव जलाकर उसमें नई फसल और रेबड़ियां, गजक समर्पित कर लोकगीत गाए गए।
लोहड़ी पर्व पर सुबह ठंडी सड़क स्थित श्रीनानक देव गुरुद्वारा में सिख धर्मानुयायियों ने गुरुग्रंथ साहिब की अरदास की। वहीं गुरुद्वारा परिसर में लोहड़ी पर्व मनाया गया। समाज के ज्ञानी विद्वान ने लोगों को त्योहार की महत्ता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि लोहड़ी रिश्तों की मधुरता, सुकून और प्रेम का प्रतीक है। लोहड़ी दुखों का नाश, प्यार और भाईचारे से मिलजुल कर नफरत का नाश करती है।
वहीं शहर की इंद्रपुरी, रेवाड़ी मोहल्ला, महाराणा प्रताप नगर, सिंधी कालोनी में सिख परिवारों द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए और रेबड़ियां बांट कर खुशियां मनाई। सिंधी कालोनी में लोगों के उत्साह का अतिरेक देखते ही बन रहा था। लोग भांगड़ा व गिद्दा पर जमकर थिरकते नजर आए। इस दौरान लोगों ने नई फसल को अगिभन में समर्पित कर खुशहाली और उन्नत कृषि की कामना की। लोगों ने जगह-जगह अलाव जलाकर लोकगीत गाए और पर्व की बधाइयां दीं।