जलेसर के श्रीनिवास अग्रवाल सरस्वती विद्या मंदिर में महर्षि वाल्मीकी जयंती पर आयोजन के दौरान मौज
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जलेसर। श्रीनिवास अग्रवाल सरस्वती विद्या मंदिर में शनिवार को आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती और महर्षि वाल्मीकि के चित्र के सामने दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण के साथ किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को महर्षि वाल्मीकि के जीवन और उनके आदर्शों से परिचित कराया गया।
मुख्य वक्ता आचार्य धर्मवीर सिंह ने कहा कि रत्नाकर से महर्षि बनने तक की यात्रा बताती है कि मनुष्य अपने कर्मों और पश्चाताप से जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। प्रधानाचार्य डॉ. गिरराज सिंह ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि रामायण के रचयिता और भारतीय संस्कृति के महान मार्गदर्शक हैं। प्रबंधक वीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि महर्षि की शिक्षा आदर्श आदर्श मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती है। कार्यक्रम का संचालन दिलेश कुमार उपाध्याय ने किया। इस अवसर पर विद्यालय के आचार्य, छात्र-छात्राएं और कर्मचारी उपस्थित रहे।