ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था के लिए लगवाए गए टैंक सफेद हाथी साबित हो रहे है। टैंक भरने के लिए लगाए गए समर खराब होने के कारण टैंक नहीं भर पाते है। इसके कारण ग्रामीणों को पानी की सप्लाई नहीं मिल पा रही। जिससे ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट बना हुआ है।
जनपद में पेयजल की किल्लत दूर कर करने के लिए वर्ष 2011 में ऐसे गांव जिनमें पानी की किल्लत थी उन गांवों में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के के तहत प्लास्टिक के टैंक लगवाकर पानी की व्यवस्था उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई। जनपद में इसके लिए दो परियोजनाएं स्वीकृत की गई।
एक परियोजना में 120 गांव जबकि दूसरी परियोजना में 42 गांव चिन्हित किए गए। इन गांवों में बडे़ टैंक को समर के माध्यम से पानी से भरवाने की व्यवस्था की गई। इन दोनों परियोजनाओं पर 609.79 लाख रुपये लागत निर्धारित हुई। जल निगम ने टैंक रखवाने के साथ ही समर भी लगवा दिए। लेकिन यह समर काम नहीं कर रहे। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी ग्रामीणों को पानी नहीं मिल पा रहा। टैंक न भरपाने से वह पेयजल का लाभ नहीं ले पाते।
आपरेटर की नहीं की व्यवस्था
पेयजल योजना के तहत टैंक भरवाने के लिए शासन स्तर से किसी आपरेटर की तैनाती का भी कोई प्रावधान नहीं हैं। जिससे तमाम ग्रामों में समय भी नहीं चल पाते। जिससे ग्रामीणों को पेयजल की व्यवस्था नहीं हो पाती।
सात माह पहले ग्राम पंचायत में टैंक लगवाया गया था। आज तक इसमें पानी की व्यवस्था नहीं हो सकी। ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिल रहा।
-नरोत्तम सिंह अहरौली
जिन ग्राम पंचायतों में योजना के तहत टैंक लगवाए गए हैं उनमें शीघ्र ही कार्य पूरा कराकर ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
-भुवनेश जैन अधिशाषी अभियंता जल निगम