राघवेंद्र सिंह गहलोत
मैनपुरी। समाजवादी पार्टी (सपा) अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को हथियार बनाकर भाजपा पर लगातार हमला कर रही है। इसकी काट के लिए भाजपा गैर-यादव और गैर-जाटव मतदाताओं को साधने में जुटी है। वहीं, अब सपा ने भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे को टक्कर देने के लिए गोमाता का सहारा लेना शुरू कर दिया है। अखिलेश यादव और डिंपल यादव के बयानों में यह बदलाव साफ झलकने लगा है।
हाल ही में गविष्ठी यात्रा पर मैनपुरी आए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के स्वागत कार्यक्रम में सपा सांसदों, विधायकों और नेताओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि सपा अब भाजपा को सनातन और गोमाता के मुद्दे पर घेरने की पूरी कोशिश करेगी।
प्रयागराज महाकुंभ में शंकराचार्य के विवाद के बाद से ही अखिलेश यादव भाजपा पर गोमाता के मुद्दे और शंकराचार्य के अपमान को लेकर हमलावर हैं। अखिलेश ने कई मंचों से भाजपा पर शंकराचार्य का अपमान करने और सनातन व गोमाता को केवल चुनावी हथकंडा बनाने का आरोप लगाया है। सपा की यह रणनीति साफ दिख रही है। वहीं, अखिलेश की पत्नी और मैनपुरी की सांसद डिंपल यादव भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही हैं। उनके बयानों में गोमाता की दुर्दशा का जिक्र बार-बार हो रहा है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गोमाता की सुरक्षा और उन्हें राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए गविष्ठी यात्रा शुरू की है। कन्नौज पहुंचने पर उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि रात गुजारने के लिए उन्हें कोई जगह नहीं दी गई जिसके चलते उन्हें सड़क पर रात बितानी पड़ी। सपा ने इस मामले को तुरंत भुनाया।
यात्रा जब औरैया से होती हुई मैनपुरी पहुंची तो सपा के पूर्व विधायक राजकुमार यादव के मैरिज होम पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां डिंपल यादव ने शंकराचार्य का भव्य स्वागत किया और कहा कि कन्नौज में प्रशासन का जो व्यवहार हुआ, उससे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव शर्मिंदा हैं और उन्होंने कार्रवाई की मांग की है।
सपा के जिलाध्यक्ष आलोक शाक्य ने कहा कि पार्टी गोमाता की सुरक्षा के लिए संकल्पित है। शंकराचार्य के गोमाता को राष्ट्रमाता बनाने के अभियान में सपा उनके साथ है। हर कार्यकर्ता इस मुहिम में उनका साथ देगा। इसके लिए भोगांव में एक युवक और शहर में पूर्व विधायक राजकुमार यादव को जिम्मेदारी दी गई है। शंकराचार्य की ओर से जल्द ही इसके लिए एक नियमावली भी जारी की जाएगी।
वरिष्ठ पत्रकार भुवनेश का कहना है कि सनातन के मुद्दे को पकड़कर सपा को ज्यादा फायदा नहीं होगा। यदि वे भाजपा की काट के लिए यह रास्ता अपनाएंगे, तो उनका मुस्लिम वोट बैंक छिटक सकता है। हालांकि, फिलहाल ज्यादातर मंचों पर सपा के नेता सनातन और गोमाता के मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहे हैं। आने वाला विधानसभा चुनाव ही बताएगा कि यह रणनीति सपा को कितना फायदा पहुंचाती है। संवाद