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सूख रही धरती की कोख, खूब हो रहा दोहन

Tue, 28 Feb 2017 10:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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खूब हो रहा दोहन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अंधाधुंध दोहन से धरती की कोख सूखती जा रही है। भूगर्भ से जल का भंडार अब खत्म हो चला है। आलम यह है कि जिले के भूगर्भ जल स्तर का 88 फीसदी से अधिक दोहन हुआ है। जिले के आठ में से तीन ब्लॉक डार्क और क्रिटिकल जोन में हैं। अगर अभी भी वर्षा जल संग्रहण के उपायों पर गौर नहीं किया गया, तो भावी पीढ़ी के लिए भूगर्भ जल बस सपना बनकर रह जाएगा।
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पिछले वर्षों में बेइंतहा भू-जल दोहन के चलते सभी ब्लॉकों में जलस्तर गिरा है। बारिश कम होने से भूगर्भ जल की स्थिति का संतुलन बिगड़ गया है। वैसे तो पानी का उपयोग साल भर होता है और बरसात बमुश्किल तीन-चार महीनों की ही होती है। फिर भी अच्छी बारिश काफी हद तक भूजल के भंडार को भर देती है। साल 2014 से औसत बारिश आधे पर आकर टिक गई है और जमकर हो रहे धरती के दोहन ने भूगर्भ जल का हाल बिगाड़ दिया है। भूगर्भ जल विभाग के आंकड़ों की मानें तो जिले में भूगर्भ जल का दोहन 88.29 फीसदी तक हुआ है। सबसे ज्यादा खराब हालात जलेसर विकास खंड में है। यहां जल का स्तर 15 मीटर तक गिर चुका है। जलेसर जहां डार्क जोन में घोषित है तो मारहरा और निधौलीकलां ब्लॉक क्रिटिकल स्थिति में है।

बोरिंग पर नहीं प्रतिबंध
यूं तो डार्कजोन जलेसर में बोरिंग पर प्रतिबंध लगा है, लेकिन इसके बाद भी लोग खुलेआम भूगर्भ का दोहन कर रहे हैं। जलेसर में जलस्तर 15 मीटर तक गिर चुका है। वहीं अन्य विकास खंडों में यही हालात हैं।
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औसत भूजल (मीटर में)
क्षेत्र            2014        2015        2016
एटा सिटी        8.07        8.08        8.10
जैथरा            6.64        7.03        7.08
जलेसर            11.08        13.50        15.00
मारहरा            7.17        08.15        08.75
निधौली कलां         9.06        10.09        11.01
शीतलपुर        7.26        8.15        8.30
अवागढ़        8.07        8.08        10.01
सकीट            6.00        6.97        7.01

इन कारणों से गिरा भूजल स्तर
- बोरिंग
- पक्के रास्तों का निर्माण
- पेड़ों का अंधाधुंध कटान
- जल को व्यर्थ बहाना
- बारिश का कम मात्रा में होना
- वर्षा जल का संग्रहण नहीं होना

जिले में भूगर्भ जल का स्तर गिरता जा रहा है। साल भर में यह दो मीटर तक खिसक जाता है। ऐसे में इस बार भी जल स्तर में गिरावट आएगी। इसको रोकने की कवायद चल रही है।
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एएस भाटी, अधिशासी अभियंता, जल निगम
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