उत्तर प्रदेश के एटा जिले से हैरान कर देने वाली खबर आई है। यहां सांपों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि महज 19 दिन में सर्पदंश से तीसरे युवक की मौत हो गई। इन्हें मिलाकर सांप अब तक 151 लोगों को काट चुके हैं।
एटा में बरसात के बाद गर्मी और उमस के चलते सर्प बिलों से बाहर निकलकर खतरा बन रहे हैं। 19 दिन में 151 लोगों को सर्पों ने डस लिया। इनमें से दो लोगों की मौत पूर्व में हो चुकी है। वहीं एक युवक की मौत बृहस्पतिवार को हो गई। सर्पदंश के बाद जो लोग झांड़ फूंक के लिए जा रहे हैं, सपेरे उनके लिए हाथ खड़े कर दे रहे हैं। उनके पास इसका कोई इलाज नहीं है। उधर चिकित्सकों ने सलाह दी है कि सर्पदंश के बाद तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।
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बरसात में बाहर निकले सर्प गर्मी से व्याकुल होकर या असुरक्षा की भावना से आसपास से गुजर रहे या बैठे हुए लोगों को डस रहे हैं। 21 जुलाई से 8 अगस्त तक 151 लोग सर्पदंश के शिकार हुए। इनमें कुछ लोग ऐसे भी थे जो सांप के डसने के बाद इधर-उधर झाड़-फूंक के प्रयास में भी रहे। जो लोग समय से मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी पहुंच गए उनका उपचार कर घर भेज दिया गया।
21 जुलाई को निधौली कलां थाना क्षेत्र के गांव धौलेश्वर निवासी हुंडीलाल को और 1 अगस्त को कक्षा 1 के छात्र दीपू को अलमारी से कपड़े निकालते समय सांप ने डस लिया। दोनों के ही परिजन जब तक मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी लाए इनकी मौत हो गई।
निधौली कलां थाना क्षेत्र के गांव रमंडपुर निवासी दयावीर सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार की शाम पिता जगदीश सिंह (80) खेत पर काम के लिए गए थे। वहां सर्प ने डस लिया तो इधर-उधर झाड़-फूंक कराते रहे। जब कोई फायदा नहीं मिला तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निधौली कलां ले गए, जहां चिकित्सक ने जगदीश को मृत घोषित कर दिया। परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराया है।
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी प्रभारी डॉ. माधवेंद्र ने बताया कि गर्मी और उमस के चलते सर्प बिल से बाहर आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के साथ ही सभी 8 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 36 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध हैं। अभी तक कोई भी सर्पदंश का शिकार मरीज एएसवी की कमी की वजह से नहीं लौटा है।
सर्पदंश होने पर क्या करें
डॉ. माधवेंद्र के अनुसार सर्प अगर डस ले तो घबराएं नहीं बल्कि सावधानी से काम लें। जहां सांप ने डसा है उस जगह को साफ पानी से धोएं। ब्लेड आदि से उस जगह पर चीरा न लगाएं। इसके अलावा उस जगह के आसपास कसकर भी न बांधे। सबसे पहले अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे जिससे कि सही समय पर उपचार हो सके और मरीज की जान बचाई जा सके। किसी प्रकार की झाड़-फूंक करने वाले लोगों के पास मरीज को न ले जाएं। देरी मरीज के लिए जानलेवा हो सकती है।