धुआं-आग उगल रहे वाहन प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। जीटी रोड और अन्य प्रमुख सड़कों के किनारे धुआं और धूल के गुबार रहते हैं। यहां सांस के लिए भी शुद्घ हवा नहीं मिलती। बीमारियां बढ़ रही हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी इस ओर कोई कदम नहीं उठा रहा।
शहर में प्रदूषण बढ़ा रहे वाहनों, जेनरेटर और अन्य उपकरणों पर भी अंकुश नहीं लग पा रहा। रोकथाम तो दूर यहां इनकी जांच की भी व्यवस्था नहीं है। इतना ही नहीं सीमित वन्य क्षेत्र भी चुनौती बन रहा है। बताते चलें कि शुद्घ पर्यावरण के लिए आवश्यक 33 प्रतिशत वन्य क्षेत्र के मुकाबले जिले में मात्र एक प्रतिशत ही वन्य क्षेत्र है।
धड़ल्ले से हो रहा कटान
हरे पेड़ों के कटान पर लगी रोक भी बेअसर है। वन विभाग और पुलिस की मिलीभगत से जिले में धड़ल्ले से कटान किया जा रहा है। आरामशीनों पर लगे ढेर इसके प्रमाण हैं। अर्द्घरात्रि से सुबह तक शहर के विभिन्न मार्गों पर हरी लकड़ियों के वाहन दिखाई देते हैं।
पॉलीथीन पर रोक नहीं
पर्यावरण के लिए घातक पॉलीथीन के प्रयोग पर रोक नहीं लग पा रही। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश भी बेअसर हैं। कारोबारियों की मानें तो प्रतिदिन हजारों रुपये की पॉलीथीन प्रयोग की जा रही है। हालांकि पालिका ने हाल ही में इसे जब्त करने के लिए टीम गठित की है, इस अभियान की सच्चाई भी पता चल जाएगी।
वामा ने चलाया था अभियान
साहित्यक संस्था वामा के तत्वावधान में चलाया गया पौधे लगाओ, पर्यावरण बचाओ अभियान अब नहीं दिख रहा। संस्था प्रमुख डॉ निरूपमा वर्मा के नेतृत्व में शहर के पेड़ पौधों पर धागा बांधकर इनकी रक्षा का संकल्प लिया गया था। साथ ही इन पर मार्मिक स्लोगन लिखकर जनहित में इनकी सुरक्षा की गुहार की थी।