नोटबंदी के बाद लोग बैंकों के बाहर कतार में लगे हैं, हर क्षेत्र इससे प्रभावित हुआ है। हर रोज सुबह लोग बैंक और एटीएम पर जाकर लाइनों में लग रहे हैं, दिन भर कतार लगी रहती है। जहां श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट है, वहीं व्यवसायियों का व्यापार भी घट गया है। कारखानों में भी छंटनी जैसी स्थिति है, दिहाड़ी मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है। प्रधानमंत्री दावा कर रहे हैं कि पचास दिन में सब कुछ सामान्य हो जाएगा, लेकिन स्थानीय सीए का मानना है कि हालात पूरी तरह से सामान्य होने में अभी कम से कम चार माह का वक्त लगेगा। इसके लाभ, नुकसान और नतीजों को लेकर गुरुवार को अमर उजाला ने शृंगार नगर एटा और प्रभुपार्क कासगंज में विशेषज्ञों के साथ मंथन किया। आम लोगों के मन में छिपे तमाम सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश की गई। इस बात पर सभी एक मत है कि इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। परेशानी कुछ दिन की है लेकिन फायदा दीर्घकालीन होगा।
एटा में बोले विशेषज्ञ
बैंकों और एटीएम पर लाइन में लगने की परेशानी अस्थायी है, नोटबंदी का फैसला दूरगामी परिणाम देने वाला है। केंद्र सरकार ने काले धन पर सटीक चोट की है। यदि केंद्र सरकार ने प्रदेश के 100 नेताओं का भी काला धन निकालकर उन्हें जेल भेजने में कामयाब हो गई तो यह बड़ी उपलब्धि होगी। प्रतीक आमौरिया, वरिष्ठ सीनियर सीए
-नोटबंदी से रियल एस्टेट सेक्टर में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगने से प्रापर्टी सस्ती होगी। नोटबंदी से परेशानी कुछ दिनों की है, लेकिन सबसे ज्यादा फायदा उन्हीं लोगों को होगा, जो आज बैंकों की लाइन में लगे हैं। प्रनय आमौरिया, सीए
-नए नोट की कमी के कारण जानता परेशान हो रही है। सरकार और आरबीआई को मिलकर 500 के नोटों की आपूर्ति देनी होगी। भ्रष्टाचार और कालाधन जमा करने वालों पर नोटबंदी बड़ा और कड़ा प्रहार है। एपी जैन, सीए
-नोटबंदी से कालाधन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, सबसे बड़ी चोट राजनीतिक भ्रष्टाचार पर लगी है। राजनीतिक भ्रष्टाचार ही अधिकारियों और नेताओं के बीच एक निरंकुश गठजोड़ बनाता है, जिसमें जनता ही पिसती है। सुनेश कुमार जैन, सीए
-जनता को हो रही परेशानी तो अस्थायी है, भ्रष्ट व्यवस्था में गरीबों के हिस्से के संसाधनों पर दूसरे ही कब्जा करते हैं, वह तो भटकते रहते हैं। नोटबंदी के बाद तस्वीर बदलेगी। गरीबों की सुविधाओं और संसाधनों में वृद्धि होगी। राकेश गुप्ता, आयकर अधिवक्ता
- नोटबंदी से बाजार में महंगाई पर अंकुश लगा है। आने वाले समय में प्रापर्टी भी सस्ती होने जा रही है। प्रापर्टी कारोबार में कालाधन इनवेस्ट नहीं होगा तो वह सस्ती होगी। हर कोई अपने घर का सपना पूरा कर सकता है। मनेश गुप्ता,आयकर अधिवक्ता
-नोटबंदी से आर्थिक इमरजेंसी जैसे दिख रहे हालात अस्थायी हैं। बाजार सामान्य होने में अभी चार से पांच महीने लगेंगे, लेकिन देश का भविष्य सुरक्षित होगा। 500 रुपये का नोट बाजार में आते ही नकदी संकट खत्म होगा और बैंकों के बाहर लाइनें खत्म होंगी। राजवीर सिंह
कासगंज में बोले विशेषज्ञ
- नोटबंदी से सामाजिक अर्थव्यवस्था बिगड़ी है। फैसला सही होने के बावजूद सवालों के घेरे में है। कैशलेस इकोनामिक पॉलिसी भारत के लिए अभी दूर की बात है। उन्होंने कहा कि डायरेक्ट टैक्स खत्म हो और जीएसटी के साथ बैंक ट्रांजेक्शन पर टैक्स लगाया जाए, जिससे भ्रष्टाचार रुकेगा, इसे लागू करने में प्लानिंग का अभाव रहा है। प्रदीप अग्रवाल, सीए
-नोटबंदी का फैसला अच्छा है, लेकिन कैशलेस की अर्थव्यवस्था अभी कायम नहीं हो सकती। प्रधानमंत्री ऐसा सोच रहे हैं, लेकिन ऐसा संभव नहीं है। अभी इसमें समय लगेगा। उद्योग-धंधे बंद हैं। इससे जीडीपी गिरेगी, ऐसी स्थिति का धैर्य के साथ सामना करना पड़ेगा। विवेक तायल, सीए
-नोटबंदी का फैसला अच्छा है इसके भविष्य में परिणाम अच्छे आएंगे। कम बैंक ब्याज पर लोगों को ऋण मिलेगा। लोगों की परचेजिंग पॉवर बढ़ेगी। बैंकों में जब पैसा होगा बाहर जाएगा। उन्होंने कहा कि कैशलेश की व्यवस्था तो अच्छी है पर अभी संभव नहीं है। इसमें वक्त लगेगा। अचिंत गर्ग, सीए
- नोटबंदी का कदम अच्छा है। कैशलेस अर्थव्यवस्था ज्यादा से ज्यादा प्रमोट करने की जरूरत है। जनता अपना हिसाब किताब भी रखती है। गांव-गांव में टीम लगाकर कैश लैस के लिए प्रशिक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्लानिंग में काफी कमी रही है, जिससे लोगों को दिक्कतें हो रहीं हैं। ललित माहेश्वरी, सीए
-अधूरी तैयारियों के बीच नोटबंदी लागू की गई, जिससे दिक्कतें हैं। देश में अनपढ़ व्यक्ति को प्रशिक्षित बनाने की जरूरत है, अन्यथा कैशलेस का मोदी जी का ख्वाब ही ख्वाब रह जाएगा। अभी व्यवस्था संभलने में छह महीने का समय लग सकता है। कैशलेस इकोनॉमी से कारोबार की स्थिति सृदृढ़ होगी। गौरव पांडे, सीए
- नोटबंदी का फैसला अच्छा है लेकिन प्लानिंग जीरो है। बैंकों में खाताधारकों को बाउचर भरना तक लोगों को नहीं आता तो कैशलेस इकोनॉमी का सपना कैसे सच होगा। व्यापार, ट्रांसपोर्ट सभी ठप है। बेहतर होता दो हजार की जगह पांच सौ और हजार की करेंसी दी जाती। अर्पित गोयल, सीए
मंथन के निष्कर्ष
पचास दिन नहीं, पूरी तरह से हालात सुधरने में लगेंगे छह माह
बिना तैयारी लागू की नोटबंदी, खराब कैश मैनेजमेंट से बिगड़े हालात
बैंकों पर कतार और समस्याएं अस्थायी, दीर्घकालीन होंगे इसके लाभ
मंथन में आए सुझाव
कैशलेस इकोनॉमी के बारे में लोग जानकारी करें
धैर्य के साथ सभी लोग इस स्थिति का सामना करें
अपनी जरूरत के हिसाब से धन खर्च करें
रुपये का लेनदेन आरटीजीएस के माध्यम से करें
ई-बैंकिंग को अपनाएं, प्लास्टिक मनी का प्रयोग करें
क्या थी एसआईटी की सिफारिशें
कासगंज (ब्यूरो)। विशेषज्ञों ने बताया कि नोटबंदी से पहले सुप्रीम कोर्ट की काला धन को लेकर गठित एसआईटी की सिफारिशों को लागू करना चाहिए था। इनमें तीन लाख रुपये तक के ट्रांजेक्शन की छूट, 15 लाख रुपये की सीमा में नकदी रखने की सिफारिश थी। यदि सरकार इन सिफारिशों को लागू कर देती तो शायद नोटबंदी जरूरत ही नहीं पड़ती।
कैशलेस व्यवस्था बेहतर, विकल्प पर चुनौतियां बहुत विशेषज्ञों ने कैशलेस व्यवस्था को सभी के हित में बताया, लेकिन इसके रास्ते में चुनौतियां बहुत अधिक हैं। अभी तो बैंक का बाउचर ही ठीक से लोग नहीं भर पाते, फिर कैसे आनलाइन या मोबाइल से लेनदेन करेंगे। ऐसे में गांव-गांव जाकर लोगों को प्रशिक्षण देने और इसके लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है।