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जिला अस्पताल में सुलग रहा बर्न वार्ड, बिलबिला रहे मरीज

Mon, 06 Mar 2017 12:48 AM IST
Amar Ujala
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बर्न वार्ड में मरीज परेशान - फोटो : Amar Ujala
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जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती झुलसे मरीज अवस्थाओं के कारण खुले में बैठकर अपने जख्म सुखाने को मजबूर हैं। वार्ड में एसी लगा है, लेकिन चलता नहीं, पंखे की हवा कभी-कभी मिलती है। वार्ड में गंदगी और खुले में बैठने के कारण मरीजों को इन्फेक्शन का खतरा बढ़ रहा है। इस वार्ड में निर्धारित तापमान पर एसी हर वक्त चलने के साथ सफाई व्यवस्था दुरुस्त होनी चाहिए। अमर उजाला टीम ने मरीजों से उनका हाल जानने की कोशिश तो वे दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की जरूरत बताते दिखे। मरीजों का यह हाल तब था, जब वार्ड में रविवार को सिर्फ तीन मरीज भर्ती थे। मौसम बदलने के कारण पारा बढ़कर 31 के पार जा चुका है। ।  
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मरीज-1
भगीपुर निवासी सूरज (6) रविवार सुबह चाय गिरने से गंभीर रुप से झुलसने पर उसे बर्न वार्ड में भर्ती कराया गया है। पिता श्रीकृष्ण ने बताया कि एक बार चिकित्सक ने देखा उसके बाद कोई नहीं आया। वार्ड ब्वाय सुबह से गायब हैं। एसी चलना तो दूर पंखे भी बंद है। गर्मी लगने पर बच्चे को बाहर बैठना पड़ता है। संक्रमण का खतरा है। सुबह से एक बार सफाई हुई। बर्न वार्ड में बच्चे के बेड के पास और जूते चप्पल दूर पड़े थे।

मरीज-2  
राजदीप निवासी घुटलई आग में झुलसने के कारण पिछले चालीस दिन से बर्न वार्ड में भर्ती है। जब उससे पूछा गया कि एसी चल रहा है तो बोला यहां एसी लगे हैं पता नहीं है। कभी-कभी पंखा चलता है। राजदीप वार्ड के बाहर बरामदे में बिलबिलाता दिखा। राजदीप ने कहा यहां नर्स और वार्ड ब्वाय किसी की नहीं सुनते। सफाई नहीं होने से वार्ड में जूते चप्पल पड़े दिखाई दिए। 24 घंटे में एक बार सफाई और डाक्टर अपने मन से आते हैं।   
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मरीज-3   
नरेरा निवासी दुर्गेश 11 विगत 26 को दीपक गिरने के कारण घर में लगी आग में झुलस कर घायल होने पर बर्न वार्ड में भर्ती कराया गया। पिता सत्यपाल ने कहा कई बार बुलाने पर एक बार डॉक्टर आता है और मरीज देख बिना कुछ बोले निकल जाता है। बोला एसी तो दूर पंखे की हवा मिल जाए तो बड़ी बात है। बच्चे को ज्यादा परेशानी होने पर खुले में बैठा कर हवा खिलानी पड़ती है।


बर्न वार्ड के ये हैँ मानक
- बर्न वार्ड में 20 से 25 डिग्री तापमान हर वक्त मेंटन रहे।
- दिन में तीन से चार बार फिनायल से सफाई होनी जरूरी है।
- तीमारदार या चिकित्सक बाहर से पहने जूते अंदर न ले जाएं।
- गंदगी, जूते चप्पल मरीजों तक जाने से इन्फेक्शन का खतरा।
- मरीज से मिलने वाले एप्रन पहन कर वार्ड में अंदर घुसें।
- झुलसे मरीजों से बाहर के लोग बार-बार नहीं मिलते।


क्या बोले चिकित्सक
बाहर बैठने वाले मरीजों को टोका जाता है, लेकिन गलत है। पता नहीं एसी क्यों नहीं चल रहा, अगर खराब है तो सही कराया जाएगा। गंदगी को लेकर सफाई कर्मी और बार्ड ब्वाय से जवाब तलब होगा।
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एके चतुर्वेदी, सीएमएस, जिला अस्पताल
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