कहते हैं राजनीति करवट बदलती है। राजनेताओं का भविष्य भी इसके साथ डांवाडोल होता है। कभी एटा की राजनीति और हर चुनाव में दबदबा रखने वाले पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह और उनका पूरा परिवार सोमवार को सपा की चुनावी रैली के होर्डिंग से पूरी तरह लापता था। पार्टी का प्रत्याशी शाक्य और विरोधी प्रत्याशी लोधी है, तो इन दोनों जातियों पर अधिक फोकस किया गया। अनकहे ढंग से पार्टी ने अपने बड़े स्थानीय नेताओं से किनारा कर लिया।
पूर्व में एटा लोकसभा सीट पर हमेशा ही यादव प्रत्याशी चुनाव लड़ते रहे हैं। वह हारे या जीते, दूसरी जाति का प्रत्याशी नहीं आता था, लेकिन इस बार बदलाव की आंधी आई। औरैया से शाक्य प्रत्याशी को चुनाव लड़ने भेजा गया। इसे लेकर यादव और इस समाज के तमाम नेता सहमत नहीं हुए। नतीजा, एक के बाद एक सपा के यादव नेताओं के पार्टी छोड़ने और भाजपा में शामिल होने का सिलसिला चल पड़ा। भले ही सपा इन नेताओं का वजूद कम बताकर तसल्ली करने की कोशिश करे, लेकिन यादवों की असंतुष्टि को नहीं नकार सकती है।
सोमवार को शहर के सैनिक पड़ाव का नजारा देखकर भी सपा समर्थकों और यादवों को खिन्नता हुई। पूरा मैदान तमाम होर्डिंगों से अटा हुआ था, लेकिन इसमें एक भी हाेर्डिंग पर सपा नेता पूर्व जिला पंचायल अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव, पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव और उनके किसी परिजन का फोटो नहीं था। मंच पर जुगेंद्र सिंह यादव की पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा यादव को तो जगह दी गई, लेकिन उनके नाम का भी कोई होर्डिंग नहीं था, जो अपने आपमें सवाल खड़ा कर रहा था कि क्या पार्टी इन नेताओं को दरकिनार अपनी छवि बदलने का प्रयास कर रही है? या मौजूदा प्रत्याशी के आगे यादव नेताओं का प्रभाव कम हो रहा है?
मंच पर ये रहे मौजूद
सपा जिलाध्यक्ष परवेज जुबैरी, पटियाली विधायक नादिरा सुल्तान, पूर्व विधायक अमित गौरव यादव, किरन यादव, कांग्रेस के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष अनिल सोलंकी आदि मंच पर मौजूद रहे।
79 सीटें जीत रहे, एक पर संघर्ष
सभा के बाद पत्रकारों के सवाल के जवाब में अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन 79 सीटें जीत रहा है। बिना किसी सीट का नाम लिए कहा, एक पर संघर्ष है। वहीं, रविवार को कासगंज में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और जलेसर में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह के दिवंगत होने पर शोक संवेदना व्यक्त न करने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में कहा कि जैसे ही खबर मिली, सबसे पहले रात 10 बजे मैंने ही उनके परिवार को फोन किया था। हमने तो उन्हें एटा से उस समय सांसद बनाया, जब भाजपा वालों ने उनका अपमान किया था।