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Etah News: जेल की दीवारों पर लिख दिए श्रीराम के जयकारे, 3 दिन की थी भूख हड़ताल

Wed, 17 Jan 2024 05:04 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
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एटा। राम मंदिर निर्माण के संकल्प में जिले की शानदार भागेदारी रही। यहां के कारसेवकों ने अयोध्या आंदोलन को जिले में धार दी। भूख हड़ताल की और जेल गए, पुलिस की लाठियां खाईं, लेकिन आंदोलन को कमजोर नहीं पड़ने दिया। जेल की दीवारों पर श्रीराम के नारे लिख दिए थे।
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साहित्यकार राजू उपाध्याय बताते हैं कि लाल कृष्ण आडवाणी की बिहार में गिरफ्तारी के बाद कार सेवकों ने अयोध्या पहुंचने का एलान कर दिया। तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार ने किसी भी कीमत पर अयोध्या में कार सेवकों को न पहुंचने देने के लिए दमन नीति बनाई। जिलों के पुलिस प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया। एटा में कारसेवकों, विहिप, आरएसएस के नेताओं सहित उत्साही युवाओं एवं व्यापारियों की नगर-मुहल्ला, तहसील वार सूचियां बनाई गईं। सबसे पहली गिरफ्तारी कारसेवा आंदोलन के प्रबल समर्थक डाॅ. वीरेंद्र पांडेय को अवागढ़ हाउस स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया गया। वह वर्तमान में अमेरिका में रह रहे हैं। इसके बाद आंदोलन से जुड़े तमाम लोगों को जेल में डाल दिया गया।
वह बताते हैं कि बात करने के बहाने बुला कर मुझे और बड़े भाई सत्येंद्र स्वप्नेश को गिरफ्तार घोषित कर दिया गया। 30 अक्तूबर को गिरफ्तार कर 31 को जिला कारागार भेजा गया। छोटे भाई संजय उपाध्याय को अस्थायी जेल भेज दिया। स्थानीय अदालतें जमानत अर्जियां खारिज कर रहीं थीं। दूसरी तरफ पुलिस राष्ट्रीय सुरक्षा कानून जैसे गंभीर मामले दर्ज करने लगी। परिणाम स्वरूप कार सेवा आंदोलन का स्वरूप जेल भरो आंदोलन के रूप में बदल गया। लोग गिरफ्तारियों के लिए लोग समूह में आने लगे। जिला जेल के अतिरिक्त अस्थायी जेल स्कूलों में बनाई गईं।
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मुझे और मेरे भाई को जेल में अपराधी श्रेणी के बैरक में रखकर कार सेवा आंदोलनकारियों से अलग कर दिया गया। इस पर मैंने अन्य कारसेवकाें संग तीन दिन की भूख हड़ताल की थी। उधर, मथुरा से संघ के पदाधिकारी एवं नेतागण एटा जेल में लाए गए जिन्होंने जेल के माहौल को राममय कर दिया। दीवारों पर मंदिर आंदोलन से संबंधित नारे लिखे गए, खुलेआम जयघोष किए गए। उन्होंने हमारी भूख हड़ताल का भी समर्थन किया। यह आंदोलन उन दिनों मीडिया की सुर्खियों में रहा और बाहर के समाज ने भी भरपूर समर्थन दिया। 33 साल पहले राममंदिर का संकल्प आज जब पूरा होता दिख रहा है तो लगता है कहीं न कही छोटे-बड़े रूप में सहयोग की आहुति हमारी भी है। यह विचार ह्रदय और आत्मा को गदगद और आह्लादित करता है।
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