शिक्षामित्रों के समायोजन रद्द करने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में मिले स्थगन आदेश से शिक्षामित्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है। जशभन में डूबे शिक्षामित्रों ने मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। अधिकांश ने इसे परिश्रम और एकता की जीत बताया।
शिक्षामित्र संगठन के नेता राजेश गुप्ता अवधेश यादव ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के स्टे आदेश से मायूस हो रहे शिक्षामित्राें के चेहरों पर मुस्कान लौटी हैै। जल्द ही एससी का निर्णय भी शिक्षामित्रों के पक्ष में आएगा और उनका सम्मान भी लौटेगा। राष्ट्रदीप पचौरी, एसके राजपूत, सुनील आदि ने कहा कि इस आदेश के बाद हमारे रुके वेतन और एरियर भुगतान की राह भी आसान हुई है। संयुक्त मोर्चा अब इसकी पहल करेगा। स्थगन आदेश पर खुशी जताने वालों में हेमलता, शौर्यशिव, ज्योति वर्मा, प्रेमलता, ऊषा, भूपेंद्र यादव, अमिता चौहान, कमलेश, भूमिका ठाकुर, वेद प्रकाश, प्रेमवती आदि प्रमुख हैं।
बताते चलें कि हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों के शिक्षक पद पर किए गए समायोजन को नियम विरुद्ध मानते हुए रद्द कर दिया था। आदेश के बाद प्रदेश के 1.72 लाख शिक्षामित्र प्रभावित हुए हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व आदेश पर स्थगनादेश जारी कर मामले की सुनवाई के लिए 24 फरवरी 2016 निर्धारित कर शिक्षामित्रों को खुशी मनाने का मौका दिया है। शिक्षामित्रों ने मामले की पैरवी के लिए देश के शिखर अधिवक्ताओं में शामिल पूर्व वित्तमंत्री पी.चिदंबरम, कपिल सिब्बल, गोपाल सुब्रहमणियम एवं के. वेणुगोपाल सहित दर्जनभर से अधिक अधिवक्ताओं को शामिल किया था।
मात्र स्टे है निर्णय नहीं!
बीटीसी संघर्ष मोर्चा ने घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मामले पर सर्वोच्च न्यायालय ने मात्र 24 फरवरी तक का स्टे दिया है न कि अंतिम निर्णय। ऐसे में इसे याची पक्ष की जीत मानना हवाई किले बनाना है। मोर्चा के अध्यक्ष अजय कुमार का कहना है कि जीत सदैव सत्य की होती है और होगी भी।