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शिक्षा और सम्मान से बदलेगी समाज में नारी की तस्वीर

Fri, 02 Sep 2016 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
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नारी सम्मान संगोष्ठी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अमर उजाला और प्रदेश सरकार की पहल पर आयोजित नारी सम्मान संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान,  ये वे तीन मूल मंत्र हैं, जिनपर चलकर देश और समाज में महिलाओं की स्थिति में बदलाव लाया जा सकता है। महिलाएं किस तरह से अपने आत्म सम्मान की रक्षा कर सकती हैं, इसकी जानकारी भी गोष्ठी में दी गई। 
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 शुक्रवार को जिला पंचायत परिसर स्थित जनेश्वर मिश्र सभागार में आयोजित हुई संगोष्ठी का दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ करने के बाद जिलाधिकारी अजय यादव ने कहा कि आजादी के सात दशक में महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ है। आज वे हर क्षेत्र में आगे हैं। रियो ओलंपिक में देश की दो बेटियों ने कीर्तिमान बनाकर पुरस्कार की शून्यता को दूर किया। महिलाओं की सुरक्षा समाज की जिम्मेदारी है। यदि हम जागरूक हो जाएं तो सुरक्षा अभियान  की जरूरत नहीं। उन्होंने बताया कि महिला सुरक्षा को प्रदेश शासन की प्राथमिकता पर है। इसके लिए पुलिस को स्कूल, बाजार में गश्त करने के के निर्देश दिए हैं। आपात सहायता के लिए 1090 नंबर पर कॉल करें।
मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र कुमार ने कहा कि महिलाओं के प्रति समाज का नजरिया तेजी से बदल रहा है। प्राचीन काल में महिलाओं का सम्मान चरम पर था। मध्य काल में संकीर्णता के चलते कमी आई, लेकिन आजाद भारत में संविधान से मिले अधिकारों ने महिलाओं को नई पहचान दी है।
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सीएमओ डाक्टर आरसी पांडेय ने स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि सशक्त महिला के लिए स्वस्थ मन एवं शरीर आवश्यक है। उन्होंने स्कूली बच्चों का वर्ष में एक बार नि:शुल्क परीक्षण कराने पर जोर दिया। 
जिला पिछड़ा वर्ग अधिकारी तूलिका शर्मा ने कहा कि महिलाओं का सम्मान भारत की संस्कृति में है। वेद पुराणों में भी महिला सम्मान को देश की प्रगति को जोड़ा गया है। बीएसए एसएस यादव ने कहा कि बिना शिक्षा के महिला सशक्त नहीं हो सकती। तीन दशक पहले स्कूलों के अभाव में बालिकाएं शिक्षा से दूर थीं, लेकिन वर्तमान में हर किमी पर प्राथमिक एवं तीन किलोमीटर पर उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं।
कार्यक्रम की शुरूआत में श्रीराम बाल भारती इंटर कालेज की छात्राओं ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। अमर उजाला के स्थानीय संपादक नीरजकांत राही ने बताया कि यह पहल उन गुमनाम महिला प्रतिभाओं को समर्पित है जो बिना किसी सम्मान एवं पुरस्कार की चाह के समाज के लिए कार्य कर रही हैं। संस्थान ने ऐसी महिलाओं को चिन्हित कर सम्मानित करने का बीड़ा उठाया है, ताकि इनका आत्म विश्वास बढ़े। कार्यक्रम का संचालन कवि राजकुमार भरत ने किया और क्लस्टर हेड सुप्रियो दास गुप्ता ने सभी का आभार जताया। बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यक्रम में शामिल हुई। 

कार्यक्रम में एसडीएम सदर संजीव कुमार, समाज कल्याण अधिकारी टीएन तिवारी, बीएसए एसएस यादव, डीपीओ अमर बहादुर, श्रम प्रवर्तन अधिकारी कौशलेश शुुक्ला, लीड बैंक मैनेजर एलसी पॉल, स्वच्छता कार्यक्रम अधिकारी मुकेश कुमार, पीओ डूडा सुभाषवीर राजपूत, भारत विकास परिषद के ब्रज प्रांत कोषाध्यक्ष विशाल अग्रवाल, रामबाल भारती इंटर कालेज के प्रधानाचार्य दुर्वेश कुमार, सेंट पॉल्स स्कूल की प्रधानाचार्य सिल्विया दास, ट्यूलिप स्कूल की प्रधानाचार्य बिंदु जायसवाल, समाजसेविका डा. निरुपमा वर्मा, डा. श्यामलता वेद, बबिता जैन प्रेरणा, डा. विनीता तिवारी,भारत विकास परिषद से पूनम अग्रवाल, डा. यज्ञेश गुप्ता, मीरा वार्ष्णेय, नीरा वार्ष्णेय, अंजू अग्रवाल, अलका गुप्ता, रितु अग्रवाल, शिक्षिका सपना यादव, गीता गुप्ता, जेएलएन कालेज से डा. प्रवेश पांडेय, दिव्या तिवारी, अनुपम जैन, डा. अनुराधा वर्मा, फैशन डिजाइनर नैना राजपूत, उद्यमी नीलम राजपूत, मीना उपाध्याय, डा. तहसीन फातिमा, प्रधानाचार्य जीआईसी अढ़ापुरा शैल शशिराज सिंह यादव, कुसुम वार्ष्णेय, डा. ऊषा किरन, पूजा गुप्ता सभासद, निर्मल यादव, अमिता जैन, खेल जगत से खुशबू वर्मा, नैना वर्मा, निकिता वर्मा, कीर्ति वर्मा, भावना वर्मा, उमा राठौर, रश्मि यादव, रानी वर्मा, पूजा वर्मा, सुनील बांदा, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के समन्वयक मदन राजपूत, संजय मिश्रा, डीके राजपूत, कोच सत्येंद्र यादव समेत जीजीआईसी एटा, श्रीराम बाल भारती इंटर कालेज, जेएलएन पीजी कालेज, लक्ष्मीबाई बालिका इंटर कालेज, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राएं और तमाम गणमान्य लोग मौजूद रहे।

प्रदेश शासन एवं अमर उजाला की संयुक्त पहल के माध्यम से मंडल स्तर पर छह एवं प्रदेश भर से 108 विशिष्ट महिलाओं को चिन्ह्ति कर सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में महिलाओं को आवेदन फार्म वितरित किए गए। अमर उजाला और प्रदेश सरकार की पहल को काफी सराहा गया और महिलाओं और छात्राओं में फार्म भरने के लिए होड़ मची रही। 

राजकीय इंटर कालेज की सपना यादव ने महिलाओं को निर्भय बनने का आह्वान करते हुए कहा कि डरने से कायरता बढ़ती है। अपना  खुद का एक उदाहरण देते हुए बताया कि नौकरी लगने के बाद एक साथी ने उन पर अंगुली रखकर छात्राओं की लाइन लगवाने के निर्देश दिए तो इसका यह कहकर उनका प्रतिवाद किया कि लाइन तो लगवाऊंगी लेकिन अंगुली नहीं रखवाऊंगी और फिर इसकी पुनरावृत्ति नहीं हुई।
अपने पैर का कांटा खुद निकालना सीखों
समाज सेविका डाक्टर निरूपमा वर्मा ने कहा कि समय के साथ महिलाओं में जागरूकता बढ़ रही है। लेकिन समाज, शासन, प्रशासन से वांछित सहयोग नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को सशक्त बनना है तो अपने पैर का कांटा खुद निकालना सीखना होगा। 
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शिक्षाविद डाक्टर श्यामलता वेद ने कहा कि समाज आज भी महिलाओं को बर्दाश्त नहीं कर रहा। हमें जन्म लेने से भी रेाका जा रहा है। जीवन की हर चरण में शोषण और उत्पीड़न हो रहा है।
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