श्रद्धालु ब्रह्ममुहूर्त के साथ ही गंगा घाटों पर पहुंचना शुरू हो गए। बाहरी जिले से आने वाले श्रद्धालु निजी वाहनों से गंगा घाटों पर पहुंचे तो स्थानीय श्रद्धालु ट्रैक्टर, बाइक और अन्य साधनों के जरिए घाटों तक पहुंचे। श्रद्धालुओं ने घाटों पर गंगा स्नान का भरपूर लुत्फ लिया। बच्चे गंगा स्नान के साथ ही मस्ती कर रहे थे। नौकायान का भी लुत्फ लिया जा रहा था। गर्मी की अधिकता के चलते काफी देर तक गंगा में डुबकी लगाई जा रही थी।
गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने गंगा मैया की पूजा अर्चना की। बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऐसे भी रहे जिन्होंने गंगा मैया की पैरावनी भी की। घाटों पर बने प्राचीन मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए भी श्रद्धालु पहुंचे। गंगा मैया के जयकारों के बीच घंटे घड़ियालों की आवाज वातावरण को धर्ममय बना रही थी। श्रद्धालुओं ने निर्धनों को अन्न वस्त्र आदि वस्तुएं दान की। निर्धनों को भोजन भी कराया।
तीर्थनगरी के हरि की पैड़ी व लहरा घाट पर पूर्णिमा गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। ब्रह्म मुहूर्त से शुरू हुए स्नान का सिलसिला देर शाम तक चला। इसके श्रद्धालुओं ने हरिपदी की परिक्रमा की व मंदिरों में देवदर्शन किए। साधु संतों व तीर्थ पुरोहितों को दान दक्षिणा देकर प्रसाद बांटा। वराह मंदिर, बाला जी दरबार, सोमेश्वर, पंचमहाशक्ति, द्वारिकाधीष आदि मंदिरों में देर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ से शहर में जाम के हालात पैदा हो गए। छह घंटे तक जाम के हालात बने रहे। श्रद्धालु व अन्य लोगों को वाहन निकालने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मार्ग के दोनों ओर लंबी-लंबी कतारें लगी रही। जाम खुलवाने में पुलिसकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
सुबह से ही सरकूलर रोड पर जाम के हालात बनने लगे। जैसे-जैसे श्रद्धालुओं के वाहन गंगा स्नान के लिए बढ़ने लगे, मार्ग के हालात बिगड़ने लगे। आठ बजे के बाद वाहनों की कतारें नजर आने लगीं। जिन श्रद्धालुओं ने ब्रह्म मुहूर्त में ही स्नान कर लिया। उनके लौटने का सिलसिला शुरू हुआ तो दोनों ओर वाहनों की कतारें बनने लगीं। नदरई से लेकर आवास विकास कालोनी तक पांच किमी लंबे मार्ग पर वाहन चालकों को काफी दिक्कतें हुई। काफी देर तक जाम में फंसे रहने से वाहनों में बैठे श्रद्धालु और बच्चे गर्मी के चलते परेशान थे। चौराहे पर खड़े यातायात एवं सिविल पुलिसकर्मी आड़े तिरछे वाहनों को व्यवस्थित कर मार्ग को खुलवाने में जुटे हुए थे। दोपहर दो बजे के बाद कुछ हालात सामान्य हो पाए।