लखनऊ में चल रहे सपा के सियासी ड्रामे पर सोमवार को दिनभर पार्टी समर्थकों और विरोधियों की निगाहें दिनभर टिकीं रहीं। पार्टी मुख्यालय के बाहर हाथापाई के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश और शिवपाल यादव गले मिले तो जिले के सपाइयों ने राहत सांस ली थी, लेकिन बाद माइक छीनने के घटनाक्रम पर समर्थकों की सांसें थम गईं। आलम यह था कि जहां पार्टी समर्थकों सारे मामले पर नजर रखे रहे। वहीं, विरोधी दल के नेता भी टीवी स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रखा था। उधर, मामले को कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिए जिले की पुलिस भी अलर्ट रही।
समाजवादी पार्टी का गढ़ कहे जाने वाले एटा जिले में पार्टी चार विधायक और तीन एमएलसी हैं। दो एमएलसी पार्टी से बाहर हो चुके हैं। अब जिले में राम गोपाल यादव और शिवपाल यादव का खेमा बचा है। सपा के दो विधायक हाईकमान के सभी धड़ों में हैं। जिले में सबसे पहले सदर विधायक आशीष यादव उर्फ आशू ने रामगोपाल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पार्टी से बाहर निकालने की मांग की थी। रविवार को पार्टी ने राम गोपाल यादव को बाहर कर दिया। लखनऊ में सोमवार की सुबह प्रदेश मुख्यालय के बाहर हाथापाई के बाद दिन में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल सिंह और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को गले मिलाने की खबर टीवी पर देखकर सपाइयों ने राहत की सांस ली। हालांकि बाद में मंच पर शिवपाल सिंह यादव द्वारा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से माइक छीनने के घटनाक्रम पर समर्थकों में निराशा रही। खास बात यह है सियासी ड्रामे पर विरोधी दलों के नेताओं की भी नजर लगी रही। लोग इस सियासी ड्रामे को विधानसभा चुनाव के लिए सपा का सबसे बड़ा नुकसान मान रहे हैं। वहीं, मामले को कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिए जिले की पुलिस भी अलर्ट रही। पुलिस ने जगह-जगह चेकिंग अभियान चला कर
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कोट-
पूरे जिले में हालात सामान्य हैं। पुलिस रूटीन चेकिंग और सुरक्षा व्यवस्था पर चौकसी रख रही है। शासन से कोई अलर्ट नहीं आया है।
अजय शंकर राय
एसएसपी एटा
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जिला प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। लखनऊ जैसे हालात कहीं भी हो सकते हैं। शासन से ऐसा कोई अलर्ट नहीं दिया है।
शंभूनाथ
डीएम एटा