एटा। लोकसभा चुनाव खत्म होने के साथ ही विकास कार्याें की समीक्षा होने लगी है। कार्यों में शिथिलता पाए जाने पर कार्रवाई का दौर भी शुरू हो गया है। ग्राम पंचायतों पर सबसे जोर दिया जा रहा था। यहां शिथिलता मिलने पर 21 पंचायत सचिवों का वेतन रोका गया है। ये लोग ग्राम पंचायतों में विकास के लिए आए रुपये से काम नहीं करा सके।जिले के सभी ब्लॉकों में पंचायत सचिवों की लापरवाही सामने आई है। ग्राम पंचायतों में नाली, सड़क, इंटर लॉकिंग आदि की प्रस्तावित कार्य भी पूरे नहीं किए गए। इसकी वजह से पंचायतों से विकास के लिए आई धनराशि पिछले वित्तीय वर्ष में वापस हो गई। इसकी समीक्षा की गई तो सचिवों की शिथिलता मानी गई। ऐसे 21 सचिव हैं, जिनकी लापरवाही की वजह से पंचायतें विकास कार्यों से अछूती रह गईं।
इनमें ब्लॉक अलीगंज के पांच, अवागढ़ के दो, जैथरा, सकीट व शीतलपुर के तीन-तीन और जलेसर के पांच सचिव शामिल हैं। इन सभी का वेतन रोकने की कार्रवाई की गई है। बता दें कि बृहस्पतिवार को खंड विकास अधिकारी मारहरा व शीतलपुर उमेश चंद्र अग्रवाल, सकीट मोहम्मद फैसल आलम, निधौली कलां दिनेश चंद्र शर्मा, अलीगंज के गोपाल और जैथरा के चंद्रमोहन का वेतन रोका जा चुका है। जबकि दो सचिवों का एक सप्ताह पहले वेतन रोका गया था।
डीपीआरओ कृष्ण कुमार सिंह चौहान ने बताया कि विकास कार्याें में शिथिलता बरतने वाले 21 सचिवों का वेतन शुक्रवार को रोका गया है। जबकि इससे पहले छह खंड विकास अधिकारी और दो सचिवों का रोका गया था। लापरवाही किसी भी हालत में मंजूर नहीं की जाएगी और लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है।