राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्राथमिक शिक्षा वर्ग में स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील की। स्वयंसेवकों ने कहा भारत को फिर से सोने की चिड़िया बनाने का प्रयास करें।
श्रीराम महाविद्यालय में चल रहे आईटीसी शिविर में रविवार को स्वदेशी वस्तुओं के महत्व पर चर्चा की गई। प्रांत कार्यवाह राजपाल ने कहा कि अंग्रेजी हुकूमत में 400 विदेशी कंपनियां देश में थीं। भारतीय कंपनियों पर उत्पाद कर, बिक्रीकर, चुंगी कर, आयकर, पुलकर जैसे पुलंदे बांध दिए थे। हम अपनी गुणवत्ता के कारण देश के अंदर जाने जाते थे लेकिन हमारी गुणवत्ता को नष्ट करने के लिए कई प्रतिबंध लादे गए थे।
भारतीय चिकित्सा प्रणाली को अंग्रेजों ने कमजोर किया। विभाग प्रचारक धर्मेंद्र ने कहा कि अंग्रेजी हुकूमत में विदेशी कंपनियों की लूट ने देश को खोखला बना दिया। उन्होंने कहा कि मैकाले की शिक्षा पद्धति, विदेशी बैंकों में भारत का धन, विज्ञापनों का बच्चों के मन पर कुप्रभाव पड़ा। प्राचीन काल में भारत सोने की चिड़िया कहलाता था, उसका कारण यहां की जलवायु, रहन-सहन, आचार-विचार, सामाजिक संबंध था।
इन्हीं आदर्शों को फिर से स्थापित कर हमें फिर से भारत को सोने की चिड़िया बनाने के प्रयास करने होंगे।
सह जिला शारीरिक प्रमुख आदित्य ने भी स्वंयसेवकों को संबोधित किया।
इस मौके पर जिला संघचालक शंभूदयाल, खंड संघचालक रमन गुप्ता, नगर संघचालक बालकिशन गुप्ता, वर्ग कार्यवाह मनोज यादव, बौद्धिक प्रमुख प्रदीप शर्मा प्रधानाचार्य, अनिल, विभाग प्रमुख धर्म जागरण मंच अर्जुन सिंह आदि मौजूद रहे।