एटा डिपो की रोडवेज बस का फाइल फोटो- अमर उजाला
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एटा। जिले में डिपो की 50 से ज्यादा बसें कंडम हालत में हैं। इसके चलते संविदाकर्मी चालक- परिचालक परेशान हैं। उन्हें ड्यूटी करने के लिए बस ही नहीं मिल रही है। सुबह से शाम तक बस की आस में वर्कशॉप में बैठे रहते हैं। इससे यात्रियों को भी परेशानी हो रही है।
रोडवेज डिपो के पास 122 बस हैं। इसमें से 50 से ज्यादा कंडम हालत में हैं। इसके चलते बसों में कोई न कोई काम होता रहता है। बसों में कार्य के चलते संविदाकर्मी चालक घंटों बैठकर वर्कशॉप में बस मिलने का इंतजार करते हैं ,लेकिन उन्हें बस नहीं मिलती है। इसके चलते वह परेशान होकर लौट जाते हैं। मंगलवार को चालक कलेक्टर सिंह ने बताया वह एक अक्तूबर से वर्कशॉप में ड्यूटी करने आ रहे हैं, लेकिन बसों में खराबी के कारण उन्हें बस नहीं मिल पा रही है। परिचालक राजीव ने बताया संविदाकर्मी को एक माह में 22 ड्यूटी व पांच हजार किलोमीटर बस चलाने का नियम है, लेकिन आठ माह से उन्होंने 22 दिन की ड्यूटी नहीं की है। इसके चलते उनका मानदेय कट जाता है। यही कहानी चालक परिचालक सुनील, प्रमोद, सुधीर, राजीव, नीतेंद्र ने बताई। उनका कहना था ड्यूटी के हिसाब से उनको मानदेय मिलता है। ड्यूटी के लिए वर्कशॉप तो हर रोज आ रहे हैं, लेकिन बस नहीं मिलती है। उन्होंने बताया बसों में खराबी के कारण आधा सैकड़ा से अधिक चालक परिचालकों की ड्यूटी पूरी नहीं हो पा रही है। सोमवार को डिपो में 122 के सापेक्ष कुल 67 बसें ही निकली थीं। वहीं मंगलवार को दोपहर तक 55 बसें वर्कशॉप से रूटों पर गईं। जबकि सोमवार को गईं बसों में 37 वापस लौट आई थीं।
रूट से वापस आने के बाद बसों को चेक किया जाता है। आठ-दस बसों में कार्य चल रहा है। चालक परिचालकों ने लगाए गए आरोप गलत हैं।
देवेंद्र सक्सेना, फोरमैन