संवाद न्यूज एजेंसी
कासगंज। लगातार बारिश और खेतों में बढ़ी नमी ने गन्ने की फसल के लिए नई चिंता खड़ी कर दी है। गन्ना विभाग ने किसानों को मानसून के दौरान फफूंद जनित रोगों से सचेत रहने को कहा है। समय पर रोकथाम नहीं की गई तो फसल की उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
जिला गन्ना अधिकारी ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि इस मौसम में लाल सड़न (रेड रॉट), पोक्का बोइंग, बैक्टीरियल टॉप रॉट और मुरझा (विल्ट) जैसे रोगों का खतरा अधिक रहता है। उन्होंने विशेष रूप से को-0238 और को-05011 किस्मों में लाल सड़न के लक्षण मिलने पर संक्रमित पौधों को जड़ सहित उखाड़कर नष्ट करने को कहा गया है। साथ ही अनुशंसित फफूंदनाशियों के प्रयोग और खेत में पानी के जमाव को रोकने पर जोर दिया गया है। विभाग ने सलाह दी है कि प्रभावित खेतों का पानी अन्य खेतों में न जाने दिया जाए और जल निकासी की उचित व्यवस्था रखी जाए।
पोक्का बोइंग रोग की स्थिति में 15 दिन के अंतराल पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या कार्बेन्डाजिम के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। वहीं विल्ट रोग से बचाव के लिए खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखने तथा सल्फर, जिंक सल्फेट और बोरेक्स का संतुलित उपयोग करने को कहा गया है।
गन्ना अधिकारी ने किसानों से बायोपेस्टिसाइड के उपयोग को भी बढ़ावा देने की अपील की है। यदि किसी क्षेत्र में रोग तेजी से फैलता दिखाई दे तो किसान तुरंत स्थानीय गन्ना विभाग के अधिकारियों या कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क करें। नियमित निगरानी, समय पर पहचान और वैज्ञानिक प्रबंधन से ही गन्ने की फसल, उसकी गुणवत्ता और किसानों की आय को सुरक्षित रखा जा सकता है।