एटा। 14 सप्ताह की गर्भवती नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता का गर्भपात कई दिन की प्रक्रिया के बाद सोमवार को पूरा हो गया है। उसके भ्रूण का डीएनए सैंपल जांच के लिए भेजा जाएगा। यह प्रक्रिया एडीजे पाॅक्सो अधिनियम न्यायालय के आदेश के बाद मेडिकल काॅलेज की टीम की देखरेख में सकुशल संपन्न हुई।
किशोरी की हालत खतरे से बाहर है। गर्भ समापन के बाद भ्रूण को विधिक रूप से सुरक्षित रखा गया है। इसकी फॉरेंसिक जांच एवं डीएनए प्रोफाइलिंग कराई गई है।
मामला कोतवाली देहात क्षेत्र के एक गांव का है। यहां से 15 वर्षीय किशोरी 30 जनवरी को स्कूल गई थी। दोपहर तक घर नहीं पहुंची। इस संबंध में आरोपी लवकुश के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने 2 फरवरी को किशोरी को बरामद कर लिया। आरोपी को जेल भेज दिया। बाद में परिजनों को उसके गर्भवती होने की जानकारी हुई। किशोरी 14 सप्ताह की गर्भवती थी।
इस संबंध में एडीजे पॉक्सो एक्ट नरेंद्र पाल राना के न्यायालय में पीडि़ता के माता-पिता ने याचिका दाखिल की। उनके अधिवक्ता अभिषेक शर्मा के अनुसार न्यायालय में दलील दी कि गर्भावस्था एक जघन्य अपराध का परिणाम है और पीड़िता न तो शारीरिक रूप से परिपक्व है और न ही गर्भ को पूर्ण अवधि तक धारण करने में सक्षम है। न्याय के हित में और पीड़िता के गरिमापूर्ण जीवन के लिए गर्भ को समाप्त करना आवश्यक है। इस पर न्यायालय ने गर्भ समापन की अनुमति दे दी। न्यायायल ने सीएमओ के निर्देशित किया था कि मेडिकल एक्सपर्ट की देखरेख में यह प्रक्रिया अपनाई जाए। भ्रूण की डीएनए प्रोफाइलिंग के भी आदेश दिए थे। इसका इस्तेमाल मुख्य मामले में सबूत के तौर पर किया जाएगा। अधिवक्ता अभिषेक शर्मा के अनुसार इस आदेश के बाद कई दिन से गर्भ समापन की प्रक्रिया चल रही थी, जो कि सोमवार को पूरी हो गई। सीएमओ डा. राजेंद्र प्रसाद के बताया भ्रूण का डीएनए सैंपल जांंच के लिए भेजा जाएगा।