एटा। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट नरेंद्र पाल राणा ने लगभग एक साल में किशोरी से दुष्कर्म के मामले में फैसला सुनाया। दोषी पाए गए महावीर निवासी गांव खरसुलिया थाना नयागांव को 20 साल की कैद की सजा दी गई है। वह खुदकुशी करने का दबाव बनाकर किशोरी को गुजरात ले गया और वहां उसके साथ दुष्कर्म किया था।
मामले में किशोरी के पिता ने थाना नयागांव में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि 6 जून 2024 की रात में उनकी करीब 16 वर्षीय पुत्री को महावीर व उसका भाई मोनू बहला-फुसलाकर मोटरसाइकिल पर ले गए हैं। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर खोजबीन शुरू की। 17 जून को उसे गुजरात से बरामद कर न्यायालय में पेश किया गया और चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। इसके आधार पर दुष्कर्म का मामला बढ़ाया गया। पुलिस ने त्वरित विवेचना करते हुए अदालत में 28 जून 2024 को महावीर के विरुद्ध आरोपपत्र प्रस्तुत कर दिया, मोनू की नामजदगी गलत बताई।
अदालत में महावीर ने खुद को झूठा फंसाए जाने की बात कही। वहीं किशोरी ने बताया कि महावीर रात के समय घर में घुसकर उसके पास आया था और बोला कि उसके साथ नहीं गई तो खुदकुशी कर लेगा और सुसाइड नोट में उसका नाम लिख देगा। इस डर से वह उसके साथ चली गई। महावीर उसे गुजरात के रजकोट में ले गया। वहां एक किराये का कमरा लेकर रखा और जबरन शारीरिक संबंधी बनाए।
दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने महावीर को दोषी पाया। 20 वर्ष के कठोर कारावास सहित 80 हजार रुपये अर्थदंड से भी दंडित करने का आदेश दिया है। इसमें से 40 हजार रुपये पीडिता को बतौर प्रतिकर दिए जाएंगे। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को पांच माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना हेागा।